लोकतंत्र के अनूठे सिपाही धरती पकड़ नागरमल बाजोरिया का पटना में निधन, लड़े थे 280 से ज्यादा चुनाव

भागलपुर के चर्चित समाजसेवी और ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक 280 से अधिक बार चुनाव लड़ने वाले नागरमल बाजोरिया उर्फ 'धरती पकड़' का गुरुवार सुबह पटना में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से पूरे बिहार के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर है।
प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक सफर
मूल रूप से पाकिस्तान के लाहौर में जन्मे नागरमल बाजोरिया का परिवार वर्ष 1930 में भागलपुर आ गया था। चुनावी राजनीति में हार-जीत के गणित से परे रहकर केवल लोकतंत्र के महापर्व में भागीदारी निभाने वाले बाजोरिया जी जीवटता की एक अनूठी मिसाल थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसी दिग्गज शख्सियतों के खिलाफ भी चुनावी मैदान में निर्दलीय ताल ठोकी थी। इसके अलावा वे करीब 17 बार राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए भी अपनी दावेदारी पेश कर चुके थे।
लोकतंत्र की ताकत का संदेश
नागरमल बाजोरिया अक्सर कहा करते थे कि चुनाव जीतना उनकी प्राथमिकता कभी नहीं रही, बल्कि वे चुनाव के माध्यम से आम आदमी को लोकतंत्र की ताकत के प्रति जागरूक करना चाहते थे। अपने इसी अनोखे संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण वे देश भर में 'धरती पकड़' के नाम से लोकप्रिय हुए। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनके असंख्य शुभचिंतकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और परिजनों को इस अपार कष्ट को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उनका जाना लोकतंत्र के एक अनूठे अध्याय का अंत है।