नालंदा: प्रतिमा विसर्जन को लेकर प्रशासन अलर्ट, डीएम-एसपी ने घाटों का लिया जायजा

नालंदा: दुर्गा पूजा के समापन के बाद प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। रविवार को जिलाधिकारी उदिता सिंह और पुलिस अधीक्षक हृदयकांत ने संयुक्त रूप से जिले के विभिन्न विसर्जन घाटों का भौतिक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया।
घाटों की सुरक्षा और सफाई पर विशेष ध्यान
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मोरा तालाब विसर्जन स्थल, मनीराम अखाड़ा घाट और कोसुत नदी स्थित घाटों का दौरा किया। जिलाधिकारी उदिता सिंह ने घाटों पर साफ-सफाई की स्थिति का अवलोकन किया और जहां भी कमी पाई गई, वहां तत्काल आवश्यक सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने विसर्जन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित इंतजामों की समीक्षा की:
- बैरिकेडिंग: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था।
- प्रकाश व्यवस्था: शाम के समय श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त रोशनी का इंतजाम।
- पानी की गहराई: विसर्जन के दौरान दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पानी की गहराई की जांच।
- भीड़ प्रबंधन: श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए जरूरी इंतजाम।
स्थानीय लोगों से संवाद और चुनौतियों पर चर्चा
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने केवल व्यवस्थाएं ही नहीं देखीं, बल्कि स्थानीय लोगों से भी सीधा संवाद किया। प्रशासन ने लोगों से पिछले वर्षों के अनुभवों के बारे में जानकारी ली, ताकि विसर्जन के दौरान आने वाली चुनौतियों से बचा जा सके।
स्थानीय निवासियों से विसर्जित की जाने वाली प्रतिमाओं की संभावित संख्या, श्रद्धालुओं की भीड़ और विसर्जन के निर्धारित समय के बारे में भी विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने घाटों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वहां प्रचलित धार्मिक परंपराओं को भी समझा, ताकि प्रशासन की योजनाएं स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के अनुरूप हों।
इस संयुक्त निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विसर्जन की पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा या सुरक्षा संबंधी खतरे का सामना न करना पड़े।