नालंदा: हड्डी एवं रीढ़ सेंटर में ई-आईसीयू सेवा शुरू, विशेषज्ञों की निगरानी
नालंदा के हड्डी एवं रीढ़ सेंटर में मेदांता के सहयोग से ई-आईसीयू सेवा शुरू हुई है, जिससे गंभीर मरीजों की निगरानी विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा की जाएगी।

बिहारशरीफ के नालंदा हड्डी एवं रीढ़ सेंटर स्थित इमरजेंसी एंड ट्रामा हॉस्पिटल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मेदांता के सहयोग से अस्पताल में ई-आईसीयू (इलेक्ट्रॉनिक इंटेंसिव केयर यूनिट) सेवा की शुरुआत कर दी गई है। इस अत्याधुनिक तकनीक की मदद से अब अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों की निगरानी दूर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा की जा सकेगी।
तकनीक से मिलेगी गंभीर मरीजों को नई जिंदगी
इस ई-आईसीयू व्यवस्था के तहत मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ों पर पल-पल नजर रखी जाएगी। आधुनिक तकनीक के माध्यम से मरीजों की हार्टबीट, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल जैसी जरूरी जानकारियां सीधे विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचेंगी। इससे मरीजों की स्थिति का तुरंत और सटीक आकलन करना संभव हो पाएगा।
अस्पताल के डॉक्टर रश्मि कुमारी नारायण और डॉक्टर कुमार अमरदीप नारायण ने इस नई सुविधा के फायदों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से इलाज के दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेने में बहुत आसानी होगी।
"ई-आईसीयू के माध्यम से गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी की जा सकेगी। इससे स्थानीय डॉक्टरों को विशेषज्ञों के साथ समन्वय बनाकर मरीजों के इलाज में मदद मिलेगी।"
इमरजेंसी में विशेषज्ञों का मिलेगा सीधा मार्गदर्शन
अक्सर इमरजेंसी और ट्रामा के मामलों में ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें तत्काल विशेष चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों की सलाह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ई-आईसीयू सेवा से स्थानीय डॉक्टरों को विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने और तुरंत चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
नर्सिंग टीम की जिम्मेदारी और भविष्य की राह
इस पूरी प्रक्रिया में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। नर्स प्रैक्टिशनर प्रीति कुमारी ने बताया कि नर्सिंग कर्मियों को निम्नलिखित कार्यों के लिए तैयार किया गया है:
- मरीजों की निरंतर और नियमित निगरानी करना।
- स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़ों को समय-समय पर अपडेट करना।
- विशेषज्ञ डॉक्टरों के निर्देशों का पालन करते हुए स्थानीय चिकित्सा टीम के साथ तालमेल बिठाना।
इस नई पहल से बिहारशरीफ और आसपास के इलाकों के गंभीर मरीजों को अब विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श के लिए बड़े शहरों की ओर भागने की जरूरत कम पड़ेगी। इमरजेंसी और ट्रामा के मामलों में समय पर सही मार्गदर्शन मिलने से इलाज की प्रक्रिया और भी बेहतर होगी।