नवादा: किसानों के विरोध के बीच मधुबन जलाशय के लिए 9 करोड़ का मुआवजा जारी
नवादा में मधुबन जलाशय परियोजना के लिए 9 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। फसल क्षति और भूमि के लिए भुगतान जारी, प्रशासन ने दस्तावेज मांगे।

बिहार के नवादा जिले में गंगाजल आपूर्ति योजना के तहत चल रही मधुबन जलाशय निर्माण परियोजना को लेकर हलचल तेज है। किसानों के विरोध के बावजूद, प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अब तक लगभग 9 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान कर दिया है।
मधुबन जलाशय परियोजना का पूरा मामला
गंगाजल आपूर्ति योजना फेज-2, पार्ट-1 के अंतर्गत मधुबन जलाशय का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मालिकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा संचालित की जा रही है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, जमीन के एवज में अब तक करीब 9 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। इसके अलावा, 324 भूखंडों से जुड़े रैयतों को फसल क्षति और अन्य मदों के लिए कुल 72 लाख 52 हजार 491 रुपये दिए गए हैं।
कानूनी प्रक्रिया और मुआवजे की दर
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण की यह पूरी कार्रवाई 'भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के तहत की गई है।
- आपातकालीन प्रावधान: इस प्रक्रिया में अधिनियम की धारा 40 के तहत आपातकालीन प्रावधानों का उपयोग किया गया।
- अधिसूचना: 17 अप्रैल 2025 को अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके बाद 28 जुलाई 2025 को अधिघोषणा प्रकाशित हुई।
- सामाजिक प्रभाव आकलन: इस विशेष प्रक्रिया में सामाजिक प्रभाव आकलन से छूट दी गई है।
- मुआवजे की राशि: प्रशासन के मुताबिक, मुआवजे की राशि न्यूनतम मूल्य पंजी के लगभग साढ़े पांच गुना तक निर्धारित की गई है।
बोरिंग और अन्य संपत्तियों का भी मिलेगा लाभ
परियोजना से प्रभावित किसानों को केवल फसल के नुकसान का ही नहीं, बल्कि उनकी अन्य संपत्तियों का भी मुआवजा दिया जा रहा है। इसमें निम्नलिखित चीजें शामिल हैं:
- अधिग्रहित भूमि
- बोरिंग
- अन्य परिसंपत्तियां और संरचनाएं
वर्तमान में जलाशय का निर्माण कार्य तेजी से जारी है और अधिग्रहित की गई भूमि अब सरकार के पास निहित हो चुकी है।
जिन किसानों को नहीं मिला पैसा, उन्हें मिला नोटिस
प्रशासन ने उन रैयतों के लिए द्वितीय नोटिस जारी किया है जिन्हें अब तक मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ है। जिला भू-अर्जन कार्यालय ने अपील की है कि प्रभावित जमीन मालिक जल्द से जल्द अपने जरूरी दस्तावेज, विशेषकर भूमि स्वामित्व प्रमाण-पत्र (LPC), कार्यालय में जमा कर दें ताकि भुगतान में देरी न हो।
"प्रशासन ने बाकी रैयतों से जरूरी दस्तावेज जमा कर मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने की अपील की है।"