बिहार और उत्तर प्रदेश में एनडीआरएफ तैनात, नेपाल में बाढ़ से गंडक नदी बेसिन पर बड़ा खतरा

Ghazala Saheb26 August 20262 min read35 viewsBihar
बिहार और उत्तर प्रदेश में एनडीआरएफ तैनात, नेपाल में बाढ़ से गंडक नदी बेसिन पर बड़ा खतरा

नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर झील फटने की घटना के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की 20 विशेष टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इस घटना के कारण नेपाल में अचानक भीषण बाढ़ आ गई, जिससे गंडक नदी की प्रमुख सहायक नदी त्रिशूली नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ने लगा है। अधिकारियों के अनुसार बुधवार सुबह त्रिशूली नदी का जलस्तर प्रति मिनट लगभग 20 सेंटीमीटर की दर से बढ़ा और अब यह पानी भारतीय सीमा की ओर आ रहा है।

गंडक बैराज के सभी गेट खोले गए

संभावित पानी के दबाव को संभालने के लिए अधिकारियों ने वाल्मीकि नगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए हैं। बैराज से वर्तमान में 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और अनुमान है कि यह डिस्चार्ज 2.5 से 3 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है। एनडीआरएफ के कमांडेंट ज्ञानेश्वर सिंह ने बिहार में नौ और उत्तर प्रदेश में ग्यारह टीमों की तैनाती की पुष्टि की है। इन टीमों के लिए पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, कुशीनगर और महाराजगंज जैसे क्षेत्रों को मुख्य रूप से चुना गया है।

प्रशासन की उच्च स्तरीय बैठकें और सतर्कता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्षेत्रीय तैयारियों का जायजा लेने के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय चर्चा की है। बिहार में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बचाव और राहत कार्यों की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की है। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर और महाराजगंज के स्थानीय प्रशासन को कड़ी चौकसी रखने का आदेश दिया है।

केंद्रीय जल आयोग की स्थिति पर नजर और पर्यटकों की स्थिति

केंद्रीय जल आयोग यानी सीडब्ल्यूसी का कहना है कि नेपाल में जलाशय का जलस्तर अब कम हो रहा है और स्थिति नियंत्रण में है। इसके बावजूद सीडब्ल्यूसी गंडक नदी बेसिन की बारीकी से निगरानी करने के लिए राज्य सरकारों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है। इसके अलावा रिपोर्टों से पता चलता है कि नेपाल में 100 से अधिक भारतीय पर्यटक लापता हैं। विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास आपातकालीन सहायता और हेल्पलाइन सहायता प्रदान कर रहे हैं।

Share:

Comments

Leave a comment