मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना: असुरक्षित बसों पर NHRC का कड़ा एक्शन
पंजाब की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना में असुरक्षित बसों के इस्तेमाल पर NHRC ने कड़ा रुख अपनाया है। बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए नोटिस जारी किया गया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' के तहत इस्तेमाल की जा रही असुरक्षित और गैर-मानक बसों को लेकर बेहद गंभीर रुख अपनाया है। यह योजना बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को तीर्थ यात्रा की सुविधा प्रदान करने के लिए चलाई जा रही है, लेकिन बसों की सुरक्षा को लेकर लगे आरोपों ने अब बड़े कानूनी संकट का रूप ले लिया है।
बुजुर्गों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती
NHRC ने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी भी कल्याणकारी योजना के नाम पर लाभार्थियों के जीवन को खतरे में नहीं डाला जा सकता। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "एक कल्याणकारी योजना लाभार्थियों के जीवन को जोखिम में नहीं डाल सकती। बुजुर्ग तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए।"
बसों में क्या हैं गंभीर खामियां?
शिकायत में बसों की संरचना में किए गए कई अवैध और खतरनाक बदलावों का खुलासा किया गया है। बसों में निम्नलिखित सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गई हैं:
- अवैध संरचनात्मक बदलाव: बसों में बिना अनुमति के बदलाव किए गए हैं।
- केबिन का अलगाव: ड्राइवर के केबिन को यात्रियों के हिस्से से अलग करने के लिए विभाजन और दरवाजे लगाए गए हैं, जो आपातकालीन स्थिति में बाधा बन सकते हैं।
- निकास में बाधा: आपातकालीन निकास (Emergency Exits) और खिड़कियों को बाधित किया गया है।
- अग्नि सुरक्षा का अभाव: आग का पता लगाने, उसे बुझाने और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था में भारी कमी है।
NHRC ने पंजाब सरकार और केंद्र को थमाया नोटिस
प्रियांक कनूंगो की अध्यक्षता वाली NHRC की पीठ ने इस मामले में पंजाब के मुख्य सचिव और भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने निम्नलिखित सख्त निर्देश दिए हैं:
- पंजाब के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से योजना के तहत इस्तेमाल होने वाली सभी बसों का तत्काल और व्यापक निरीक्षण करने का आदेश दिया गया है।
- जो भी बस अनिवार्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करती पाई जाएगी, उसे तुरंत सेवा से हटा दिया जाना चाहिए।
- आयोग ने दोनों अधिकारियों को सात दिनों के भीतर विस्तृत 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) सौंपने का निर्देश दिया है।
जवाबदेही तय करने पर जोर
आयोग ने साफ कर दिया है कि केवल विभागीय जवाब या सामान्य आश्वासन से काम नहीं चलेगा। पंजाब के मुख्य सचिव को अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि:
- योजना के तहत कुल कितनी बसें तैनात हैं?
- कितने निरीक्षण किए गए और कितनी खामियां पाई गईं?
- कितनी बसों को सेवा से हटाया गया?
- किन अधिकारियों और ऑपरेटरों की लापरवाही के लिए उन पर कार्रवाई की गई है?
इसके साथ ही, सड़क परिवहन मंत्रालय को भी बसों के डिजाइन मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुपालन की जांच करने और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया है।