रुपये की कीमत तय नहीं करता RBI, उतार-चढ़ाव रोकने का काम: सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि RBI रुपये की कीमत तय नहीं करता, बल्कि बाजार में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव को रोकने का काम करता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपये की अस्थिरता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। तिरुचिरापल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की कीमत निर्धारित करने वाला निकाय नहीं है, बल्कि इसका मुख्य कार्य बाजार में रुपये के मूल्य में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।
रुपये की अस्थिरता और RBI की भूमिका
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि RBI का उद्देश्य विनिमय दर (exchange rate) को फिक्स करना नहीं है, बल्कि मुद्रा में होने वाली अत्यधिक हलचल को रोकना है। उन्होंने कहा कि रुपये में अचानक होने वाले बदलावों का असर देश की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से आयात लागत और मुद्रास्फीति (inflation) पर पड़ता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए RBI जरूरी कदम उठाता है।
अर्थव्यवस्था और कर्ज पर सरकार का विजन
देश की आर्थिक स्थिति पर चर्चा करते हुए सीतारमण ने बताया कि भारत का राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) लगातार कम हो रहा है। उन्होंने सरकार के एक बड़े लक्ष्य का भी उल्लेख किया:
- कर्ज प्रबंधन: सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक ऋण-जीडीपी अनुपात (debt-to-GDP ratio) को घटाकर 50 प्रतिशत तक लाना है।
- कर्ज की स्थिति: उन्होंने स्वीकार किया कि कर्ज के स्तर को लेकर चिंताएं जायज हैं, लेकिन आंकड़ों के अनुसार कर्ज का बोझ लगातार कम हो रहा है।
महंगाई के पीछे बाहरी कारण
मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव पर बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि महंगाई के लिए केवल घरेलू कारक ही नहीं, बल्कि कई वैश्विक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं, जैसे:
- कोविड-19 महामारी का प्रभाव।
- वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्ष (Geopolitical conflicts)।
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इन बाहरी कारकों के असर को कम करने और जनता को राहत देने के लिए लगातार काम कर रही है।
महिला सशक्तिकरण और शिक्षा का महत्व
अपने कॉलेज के शताब्दी समारोह के दौरान, सीतारमण ने महिलाओं की शिक्षा को आर्थिक मजबूती से जोड़ने की वकालत की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली लाभ तब है जब वह रोजगार, उद्यम और नेतृत्व के नए अवसर पैदा करे।
"लगभग दो-तिहाई मुद्रा ऋण (Mudra loans) महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे उन्हें अपने छोटे व्यवसायों को स्थापित करने और बढ़ाने में बड़ी मदद मिल रही है।"
कौशल विकास और भविष्य की तकनीकें
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 60,000 करोड़ रुपये की लागत से 1,000 सरकारी ITIs को अपग्रेड किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी और क्लाइमेट साइंस जैसे उभरते क्षेत्रों में महारत हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।