यूपीआई ट्रांजेक्शन कॉस्ट को लेकर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार Lahiri का बड़ा बयान, बिज़नेस को वहन करना चाहिए मामूली खर्च

Ghazala Saheb16 September 20261 min read16 viewsBihar
यूपीआई ट्रांजेक्शन कॉस्ट को लेकर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार Lahiri का बड़ा बयान, बिज़नेस को वहन करना चाहिए मामूली खर्च

नीति आयोग के Vice Chairman Ashok Kumar Lahiri ने बुधवार को कहा है कि बिज़नेस को मामूली UPI transaction कॉस्ट का खर्च खुद उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार हर ट्रांजैक्शन पर subsidy नहीं दे सकती है। यह उनका व्यक्तिगत विचार है और यह NITI Aayog का official position नहीं है। ANI से बातचीत करते हुए लाहिरी ने कहा कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने में खर्च आता है और सवाल उठाया कि इसका खर्च आखिर किसे उठाना चाहिए।

यूज़र पेज़ के सिद्धांत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग सेवा का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसके खर्च में योगदान देना चाहिए। सरकार से हमेशा इसके समर्थन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि यह नीति आयोग की आधिकारिक स्थिति नहीं है, बल्कि उनका व्यक्तिगत विचार है। किसी भी बिज़नेस या ट्रांजैक्शन में यूज़र को भुगतान करना चाहिए।

लाहिरी ने आगे स्पष्ट किया कि बिज़नेस पर चार्ज लगाया जा सकता है, लेकिन यह levy मामूली होना चाहिए। इससे डिजिटल पेमेंट का विस्तार रुकना नहीं चाहिए। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि सरकार हर चीज़ के लिए grant या subsidy देगी। ऐसा होने पर बिज़नेस कैसे चलेगा। बिज़नेस से चार्ज लें, लेकिन उतना ही लें जितना ज़रूरी है ताकि सिस्टम आगे भी बढ़ता रहे।

सरकार ने कहा है कि नए UPI framework का किसी भी person-to-person ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। UPI सभी person-to-person ट्रांजैक्शन के लिए पूरी तरह से free रहेगा, चाहे रकम कितनी भी हो। लगभग 96 प्रतिशत P2M ट्रांजैक्शन इससे प्रभावित नहीं होंगे। MDR सिर्फ 2,000 रुपये से ज़्यादा के चुनिंदा merchant ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। सरकार ने साफ किया है कि MDR ना तो कोई टैक्स है और ना ही वसूला गया चार्ज है, बल्कि इसे बैंकों और पेमेंट एप्लीकेशन प्रोवाइडर्स सहित पेमेंट इकोसिस्टम के बीच बांटा जाता है।

Share:

Comments

Leave a comment