नीतीश का 'जीविका मॉडल' बना देश के लिए मिसाल, 20 साल पूरे होने पर बिहार में जश्न

Ghazala Saheb1 October 20262 min read0 viewsBihar
नीतीश का 'जीविका मॉडल' बना देश के लिए मिसाल, 20 साल पूरे होने पर बिहार में जश्न

बिहार में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में नीतीश कुमार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाने वाली 'जीविका' योजना के 20 साल पूरे होने जा रहे हैं। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस अवसर पर कहा कि जीविका मॉडल अब केवल बिहार की सफलता नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है।

'नीतीश संवाद' के जरिए मनाया जाएगा उत्सव

जीविका कार्यक्रम की शानदार यात्रा के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आगामी 2 अक्टूबर को जदयू पूरे प्रदेश में भव्य कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। इस कार्यक्रम का नाम "नीतीश संवाद - जीविका के 20 साल बेमिसाल" रखा गया है।

उमेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि इस आयोजन को लेकर पूरे प्रदेश में, विशेषकर महिलाओं के बीच भारी उत्साह है। कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए पार्टी ने मंत्रियों, विधायकों और विधान पार्षदों को विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस माध्यम से जीविका की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा और महिलाएं इस ऐतिहासिक पहल के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपना आभार व्यक्त करेंगी।

करोड़ों महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की रोशनी

वर्ष 2006 में विश्व बैंक के सहयोग से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ यह कार्यक्रम आज एक विशाल सामाजिक और आर्थिक अभियान का रूप ले चुका है। इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन केंद्र सरकार ने जीविका के इसी सफल मॉडल को देशभर में 'आजीविका' के नाम से लागू किया था।

वर्तमान में जीविका की पहुंच और प्रभाव के आंकड़े बेहद प्रभावशाली हैं:

  • कुल समूह: बिहार में 13 लाख से अधिक जीविका समूह सक्रिय हैं।
  • जुड़ी महिलाएं: लगभग 1 करोड़ 88 लाख से अधिक महिलाएं इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
  • आर्थिक गतिविधियां: महिलाएं मुर्गी पालन, बकरी पालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पादन और पौधशाला जैसे कार्यों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
  • डिजिटल बाजार: जीविका से जुड़े उत्पादों को अब फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी बाजार मिल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

नीतीश कुमार की इस दूरदर्शी पहल को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। जीविका की नवाचारी पहल 'दीदी की लाइब्रेरी' को अमेरिका के प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका में विशेष स्थान मिला है। साथ ही, विश्व बैंक ने भी समय-समय पर इस कार्यक्रम की सराहना की है।

"नीतीश कुमार की इस क्रांतिकारी पहल ने करोड़ों परिवारों को गरीबी, लाचारी और पिछड़ेपन से बाहर निकलने का अवसर दिया है और उनके जीवन में विकास की नई रोशनी पहुंचाई है।"

जदयू नेताओं का मानना है कि जीविका मॉडल ने बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं के सामाजिक स्तर को बदलने में एक मील का पत्थर साबित होने का काम किया है।

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