सारण में नीतीश संवाद: फरक्का संधि के नवीनीकरण पर जदयू का कड़ा विरोध

Ghazala Saheb6 October 20261 min read0 viewsBihar
सारण में नीतीश संवाद: फरक्का संधि के नवीनीकरण पर जदयू का कड़ा विरोध

बिहार के सारण जिले में जल अधिकारों की रक्षा और जन-जागरूकता के उद्देश्य से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) द्वारा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम 'नीतीश संवाद' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से पार्टी ने गंगा नदी के किनारे बसे 12 जिलों की जल संबंधी समस्याओं और अधिकारों को प्रमुखता से उठाया।

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में पार्टी का एक केंद्रीय दल बिहार के विभिन्न गंगा प्रभावित जिलों के प्रवास पर निकला है। इस दल ने बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार जैसे क्षेत्रों का दौरा किया है।

फरक्का संधि के मौजूदा स्वरूप का विरोध

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय कुमार झा ने वर्ष 1996 में हस्ताक्षरित फरक्का गंगा जल संधि पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली इस ऐतिहासिक संधि का मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण कतई स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

संजय झा ने जल संकट से जुड़े गंभीर आंकड़े पेश करते हुए बताया कि:

  • पिछले 30 वर्षों के दौरान, जनवरी से मई के महीनों में, जब राज्य में सिंचाई की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, तब बिहार के हिस्से का लगभग 73 प्रतिशत पानी आगे बह जाता है।
  • पार्टी की पुरजोर मांग है कि यदि कूटनीतिक कारणों से संधि का पुनरीक्षण करना अनिवार्य हो, तो इसे वर्ष 2050 तक की संभावित जनसंख्या और जल आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए तय किया जाए।

राष्ट्रीय सिल्ट नीति की मांग और गाद की समस्या

इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा वर्षों से उठाई जा रही राष्ट्रीय सिल्ट नीति की मांग को भी फिर से दोहराया गया। संजय झा ने कहा कि फरक्का बैराज के अपस्ट्रीम में भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमा होने के कारण गंगा नदी

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