संसद की तर्ज पर राज्यों के लिए भी हो डिजिटल ऑडिट प्लेटफॉर्म: ओम बिरला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने राज्यों की विधानसभाओं के लिए संसद की तर्ज पर डिजिटल ऑडिट मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव दिया है।

केरल के तिरुवनंतपुरम में आयोजित लोक सभा और राज्य विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (PAC) के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि संसद की समितियों की तरह राज्य विधानसभाओं के लिए भी एक 'कॉमन डिजिटल ऑडिट मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म' विकसित किया जाना चाहिए।
तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता और दक्षता
ओम बिरला ने कहा कि विधायी समितियों के कामकाज में तकनीकी एकीकरण की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक डिजिटल प्लेटफॉर्म होने से ऑडिट टिप्पणियों की व्यवस्थित निगरानी की जा सकेगी, फॉलो-अप तंत्र को मजबूत किया जा सकेगा और ऑडिट रिपोर्टों का समय पर निपटान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा, "तकनीक को संस्थागत परिवर्तन का माध्यम बनना चाहिए। डिजिटल नवाचारों को अपनाने से विधायी निरीक्षण की दक्षता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता में काफी वृद्धि होगी।"
तकनीक और मानवीय मूल्यों का संतुलन
हालांकि, उन्होंने तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति आगाह भी किया। बिरला ने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति को हमेशा मानवीय मूल्यों, बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता से जुड़ा होना चाहिए।
- तकनीक संस्थागत जवाबदेही को मजबूत कर सकती है, लेकिन यह मानवीय निर्णय का विकल्प नहीं हो सकती।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त डेटा की सटीकता, प्रमाणिकता और निष्पक्षता बनाए रखना अनिवार्य है।
- शासन की विश्वसनीयता उस जानकारी पर निर्भर करती है जिसके आधार पर निर्णय लिए जाते हैं।
लोक लेखा समितियों (PAC) की भूमिका और जवाबदेही
सम्मेलन के दौरान लोक लेखा समितियों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। ओम बिरला ने कहा कि जबकि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑडिट करते हैं, वहीं लोक लेखा समितियों की जिम्मेदारी ऑडिट निष्कर्षों की जांच करना और उनकी सिफारिशों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
"ऑडिट टिप्पणियां केवल रिपोर्टों और रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; उन्हें प्रशासनिक कामकाज में सुधार के लिए ठोस सुधारात्मक उपायों में बदलना चाहिए।"
लोकसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल द्वारा दिए गए सुझावों का उल्लेख करते हुए, ओम बिरला ने संसद और राज्य विधानसभाओं की समितियों को मिलकर एक व्यापक ऑडिट और मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका को इन समितियों की सिफारिशों को उचित महत्व देना चाहिए और उनका समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
'केरल संकल्प' बनेगा भविष्य का रोडमैप
सम्मेलन के समापन पर 'केरल संकल्प' अपनाया गया, जो आने वाले वर्षों में इन महत्वपूर्ण विधायी संस्थानों के कामकाज को मजबूत करने के लिए एक मार्गदर्शक रोडमैप के रूप में कार्य करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना, संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाना और शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाना है।