वोटर लिस्ट से नाम हटाना गंभीर मुद्दा, अब सुप्रीम कोर्ट भी उठा रहा सवाल

Ghazala Saheb6 October 20262 min read0 viewsBihar
वोटर लिस्ट से नाम हटाना गंभीर मुद्दा, अब सुप्रीम कोर्ट भी उठा रहा सवाल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी गठबंधन 'INDIA bloc' के विरोध प्रदर्शन का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची से नाम हटाने का मामला अब गंभीर हो गया है और सुप्रीम कोर्ट भी इस पर सवाल उठा रहा है।

INDIA गठबंधन का बड़ा कदम और विरोध प्रदर्शन

ओमर अब्दुल्ला ने बताया कि हाल ही में आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक में इस मुद्दे से निपटने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा, "पिछले कुछ दिनों में आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक में एक कैलेंडर तैयार किया गया है। इसकी शुरुआत सांसदों द्वारा चुनाव आयोग तक मार्च निकालने से हुई है और यह सिलसिला जारी रहेगा।"

विपक्षी दल इस समय 'बचाओ लोकतंत्र' (Save Democracy) अभियान के तहत चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकालकर मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आयोग से जवाबदेही की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की चिंता पहले भी जताई गई थी, लेकिन उस समय इन चिंताओं को बहुत कम महत्व दिया गया था। उन्होंने कहा, "इस मुद्दे की वकालत पहले भी की गई थी, लेकिन बहुत कम लोगों ने सुना। अब सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर सवाल उठा रहा है।"

उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दल अब अदालत की कार्यवाही पर नजर रखेंगे। ओमर अब्दुल्ला के अनुसार, "हम यह देखने के लिए इंतजार करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को कैसे देखता है और मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर क्या निर्णय लिया जाता है।"

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। विवाद तब और गहरा गया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंहandू और विवेक जोशी ने इस प्रक्रिया के दौरान 14 आपत्तियां उठाई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी निर्णय सर्वसम्मत थे।

इसके अलावा, विपक्षी दलों ने फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल खड़े किए हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसने SIR प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं के नामांकन के लिए उपयोग किए जा रहे फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। इसी बिंदु को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

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