"कागजों तक सीमित न रहे दो-भाषा नीति": पी चिदंबरम की बड़ी मांग

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नीति केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए ताकि छात्र इसका वास्तविक लाभ उठा सकें।
तमिल और अंग्रेजी में निपुणता पर जोर
पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जो लोग दो-भाषा नीति का समर्थन करते हैं, विशेष रूप से युवा छात्रों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे तमिल और अंग्रेजी दोनों भाषाओं को धाराप्रवाह बोल सकें और उनका सही उच्चारण कर सकें।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए:
- सभी स्कूलों में प्रशिक्षित तमिल शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- अंग्रेजी भाषा के शिक्षण के लिए भी कुशल और प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता है।
- दो-भाषा नीति को पूरे तमिलनाडु में वास्तविक रूप से लागू किया जाना चाहिए, न कि केवल कागजी कार्रवाई तक।
राज्यपाल के संबोधन के बीच आया बयान
चिदंबरम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्यपाल विश्वनाथ अर्लेकर ने 17वीं तमिलनाडु विधानसभा को संबोधित किया था। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार की भाषा और शिक्षा संबंधी नीतिगत स्थिति को स्पष्ट किया था।
"तमिलनाडु में दो-भाषा नीति का पालन 1968 के विधानसभा प्रस्ताव के बाद से किया जा रहा है। यह सरकार इसी नीति का पालन करना जारी रखेगी क्योंकि तमिलनाडु के लोगों ने इसे स्वीकार किया है।"
NEP और तीन-भाषा सूत्र का विरोध
तमिलनाडु में भाषा का मुद्दा हमेशा से एक प्रमुख राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्रस्तावित तीन-भाषा सूत्र का कड़ा विरोध किया है। तमिलनाडु अपनी मौजूदा दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) पर मजबूती से कायम है और किसी भी ऐसे बदलाव का विरोध करता रहा है जो इसकी भाषाई पहचान को प्रभावित करे।