मैसेरखाना का निलंबन 'तानाशाही', परगट सिंह ने AAP पर साधा निशाना

पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सुखवीर सिंह मैसेरखाना के निलंबन को 'तानाशाही' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम राज्य की जमीनी हकीकत पर आलोचना स्वीकार न करने की सत्तारूढ़ पार्टी की अनिच्छा को दर्शाता है।
मैसेरखाना के निलंबन पर मचा बवाल
सुखवीर सिंह मैसेरखाना को 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' के आरोप में AAP की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। दरअसल, मैसेरखाना ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की कमी जैसे बुनियादी मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाया था।
एक वीडियो के माध्यम से मैसेरखाना ने अपनी बात रखते हुए कहा था:
"मैं स्कूलों के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके लिए लड़ रहा हूं। यह सिर्फ मेरे बच्चों के पढ़ने का मामला नहीं है, बल्कि उन सभी बच्चों का है जो इन स्कूलों में पढ़ते हैं। मैं स्कूलों की स्थिति को और बर्दाश्त नहीं कर सकता था। अगर मैं गलत हूं, तो मैं माफी मांगता हूं, लेकिन मैं आज इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि स्थिति असहनीय हो गई है।"
परगट सिंह का AAP सरकार पर तीखा हमला
परगट सिंह ने केजरीवाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को अपनी जिम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए। उन्होंने AAP के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के दावे केवल एक 'मुखौटा' हैं।
कानून-व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
परगट सिंह ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:
- राज्य में नेतृत्व की भारी कमी है, चाहे वह पुलिस बल हो या राजनीतिक नेतृत्व।
- हाल ही में हुई हत्याओं की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
- पंजाब ने पहले कभी ऐसी कानून-व्यवस्था की स्थिति का सामना नहीं किया है।
उन्होंने दावा किया कि जब कांग्रेस सत्ता में वापस आएगी, तब पुलिस बल में पेशेवर दृष्टिकोण देखने को मिलेगा।
कांग्रेस की एकजुटता का दावा
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बजवा ने भी नए कांग्रेस नेतृत्व का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है और 2027 के विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत के साथ उतरेगी। बजवा ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब के लोग आने वाले चुनावों में AAP सरकार की नीतियों का जवाब देंगे।