फारबिसगंज में जैन समाज ने मनाया पर्युषण पर्व का दूसरा दिन स्वाध्याय दिवस के रूप में

Akhand India Desk9 September 20262 min read2 viewsDharm
फारबिसगंज में जैन समाज ने मनाया पर्युषण पर्व का दूसरा दिन स्वाध्याय दिवस के रूप में

अररिया 09 सितम्बर: फारबिसगंज के तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को जैन समाज के लोगों ने इस दिवस को स्वाध्याय दिवस के रूप में मनाया। पर्युषण पर्व आत्म अवलोकन और आत्मचिंतन का पर्व है, जो भौतिक चकाचौंध से अलग आत्मा में रमण करने का अवसर देता है। पर्युषण पर्व के दूसरे दिन को स्वाध्याय दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि व्यक्ति खाद्य संयम करके स्वाध्याय के द्वारा अपनी आत्मा का कल्याण कर सके।

स्वाध्याय से बढ़ता है ज्ञान

तेरापंथ में विराजित उपासकद्वय मुनीश जैन एवं भूपेन्द्र बरडिया ने स्वाध्याय दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति को धार्मिक पुस्तकों का स्वाध्याय करना चाहिए, ताकि हम अपना और अपनी आत्मा का अधिक से अधिक चिंतन मनन कर सके। स्वाध्याय दिवस स्वयं को जानने, समझने और निखारने की सरलतम साधना है। उपासक भूपेंद्र बरड़िया ने कहा कि स्वाध्याय करने से व्यक्ति में ज्ञान बढ़ता है एवं जानने की इच्छा प्रकट होती है। उन्होंने स्वाध्याय के अंग जैसे वाचना, पृच्छना, परिवर्तना और अनुप्रेक्षा के बारे में जानकारी दी। स्वाध्याय के द्वारा ही व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। अगर व्यक्ति सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान को पढ़ने तक सीमित न रखकर उस पर आत्म चिंतन करता है, तभी स्वाध्याय दिवस को मनाने की सार्थकता सिद्ध हो सकती है।

सम्यक दृष्टि और स्वाध्याय का महत्व

प्रवक्ता उपासक मुनीश जैन ने उपस्थित धर्म समाज को सम्यक दृष्टि और मिथ्या दृष्टि की स्थिति को समझाते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि वाला व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों के आने पर भी अपने सम्यकत्व को नहीं छोड़ता है। स्वाध्याय इस सम्यक दृष्टि की पहली सीढ़ी है क्योंकि स्वाध्याय ही हमारा ज्ञान बढ़ाता है एवं ज्ञान से ही हम सम्यकत्व एवं मिथ्या के भेद को जान पाते हैं। तरह-तरह की छोटी कहानियों के माध्यम से उपासकद्वय ने बड़े ही रोचक ढंग से तेरापंथ धर्म के मर्म को समझाया। पर्युषण पर्व के दूसरे दिन भी स्थानीय श्रावक श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति दर्ज की गई।

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