धोखाधड़ी पड़ी महंगी: मशीनें नहीं दीं तो ब्याज समेत पैसे लौटाने का आदेश

पटना: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए धोखाधड़ी करने वाले विक्रेता को सख्त निर्देश दिए हैं। सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीनों की अधूरी आपूर्ति करने के मामले में आयोग ने विपक्षी को न केवल मूल राशि, बल्कि भारी ब्याज और मुआवजे के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिहार उद्यमी योजना की एक लाभार्थी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए इंडियामार्ट के माध्यम से सैनिटरी पैड निर्माण मशीनें खरीदने का निर्णय लिया था। इस प्रक्रिया में उन्होंने विपक्षी विक्रेता को 3 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान (एडवांस) किया था।
हालांकि, भुगतान के बाद विक्रेता ने पूरी मशीनें उपलब्ध नहीं कराईं। कुछ मशीनें तो दी गईं, लेकिन शेष आवश्यक मशीनें उपलब्ध नहीं कराई गईं। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में बार-बार आश्वासन मांगा और कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकला।
आयोग का कड़ा फैसला
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र एवं सदस्य रजनीश कुमार ने सेवा में कमी को स्वीकार किया। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित आदेश पारित किए:
- मूल राशि की वापसी: विक्रेता को शिकायतकर्ता की 1,30,000 रुपये की राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करनी होगी।
- मानसिक पीड़ा का मुआवजा: आजीविका के अवसरों के नुकसान और मानसिक तनाव के लिए 75,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।
- मुकदमा खर्च: कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के लिए 10,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
60 दिनों के भीतर पालन करना होगा आदेश
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश की प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर सभी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। यह फैसला उन विक्रेताओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो ग्राहकों के साथ अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करते हैं या सेवा में लापरवाही बरतते हैं।