अशोकधाम त्रासदी: पटना हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जांच रिपोर्ट पर जवाब
अशोकधाम हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत के मामले में पटना हाईकोर्ट सख्त। कोर्ट ने बिहार सरकार को जांच रिपोर्ट पर जवाब देने का आदेश दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने अशोकधाम में हुई दर्दनाक त्रासदी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की जांच रिपोर्ट पर अपना विस्तृत जवाब 15 दिनों के भीतर दाखिल करे। अदालत की इस टिप्पणी से राज्य प्रशासन में हलचल तेज हो गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह दुखद घटना 17 अगस्त 2026 की है, जब श्रावणी मेले के तीसरे सोमवार के दौरान अशोकधाम में एक बड़ा हादसा हुआ था। इस भीषण त्रासदी में आठ श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। इस घटना के बाद से ही प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस मामले को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
जांच रिपोर्ट को छिपाने पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील सनी कुमार ने अदालत को सूचित किया कि हालांकि प्रशासन ने इस घटना की जांच पूरी कर ली है, लेकिन अब तक जांच के निष्कर्षों और रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। सरकार की इस चुप्पी और पारदर्शिता की कमी पर मुख्य न्यायाधीश ने असंतोष जताया और सरकार को दो सप्ताह के भीतर औपचारिक जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
किन बड़े अधिकारियों की गर्दन पर है तलवार?
इस मामले में केवल स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि कई उच्चाधिकारी और बिजली विभाग के अधिकारी भी प्रतिवादी बनाए गए हैं। याचिका में निम्नलिखित विभागों और अधिकारियों को शामिल किया गया है:
- बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP)
- सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव
- मुंगेर कमिश्नर और डीआईजी (DIG)
- लखीसराय के जिला मजिस्ट्रेट (DM), पुलिस अधीक्षक (SP) और अनुमंडल पदाधिकारी (SDM)
- दक्षिण बिहार विद्युत वितरण कंपनी के सीएमडी (CMD) और एमडी (MD)
- लखीसराय के अधिशाषी अभियंता (Executive Engineer)
अब सरकार के जवाब पर टिकी निगाहें
अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब सबकी नजरें बिहार सरकार के आगामी जवाब पर टिकी हैं। इस जवाब से यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर उस दिन सुरक्षा व्यवस्था में कहां बड़ी चूक हुई थी और इस त्रासदी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कोर्ट का यह हस्तक्षेप सुरक्षा उपायों और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।