पटना हाईकोर्ट के बड़े फैसले: बेगूसराय केस में बरी, शिक्षकों को वेतन का आदेश

पटना हाईकोर्ट ने दुर्गा पूजा अवकाश शुरू होने से पहले कई महत्वपूर्ण न्यायिक और प्रशासनिक आदेश जारी किए हैं। इन पटना हाईकोर्ट के फैसले में बेगूसराय के एक पुराने मामले से लेकर जयप्रकाश विश्वविद्यालय के शिक्षकों के वेतन तक के अहम मुद्दे शामिल हैं। अदालत के निर्धारित अवकाश के अनुसार, 16 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2026 तक सभी अदालतें बंद रहेंगी, जिसके बाद 26 अक्टूबर से नियमित कामकाज शुरू होगा। हालांकि, जमानत और रिमांड जैसे आवश्यक न्यायिक कार्यों की सुनवाई अवकाश के दौरान भी जारी रहेगी।
बेगूसराय मामले में दुष्कर्म के आरोप से बरी
एक महत्वपूर्ण आपराधिक मामले में, हाईकोर्ट ने 2010 के बेगूसराय मामले के आरोपी मोहम्मद ऐनुल हक को दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी महिला पर जबरन लेटना और उसका मुंह दबाना अनिवार्य रूप से दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने घुसपैठ और महिला की शालीनता भंग करने के आरोपों के तहत उनकी सजा को बरकरार रखा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट भी इस तरह के न्यायिक टिप्पणियों की समीक्षा कर रहा है।
शिक्षकों के वेतन और जेपी यूनिवर्सिटी पर आदेश
जयप्रकाश विश्वविद्यालय में शिक्षकों के वेतन को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बड़ा निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि शिक्षकों को उनका बकाया वेतन तत्काल भुगतान किया जाए। अदालत ने उन पिछले निर्देशों को भी पलट दिया है जिन्होंने वेतन भुगतान और प्रतिनियुक्ति (deputation) की प्रक्रियाओं को रोक रखा था।
कानूनी प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
न्यायिक प्रक्रियाओं को लेकर भी अदालत ने कड़े निर्देश दिए हैं। राकेश कुमार तिवारी के मामले में, जस्टिस सोनी श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNSS) के तहत, किसी भी आरोपी को नोटिस दिए बिना अदालत संज्ञान (cognizance) नहीं ले सकती। इस आधार पर संबंधित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।
इसके अलावा, वैवाहिक विवादों पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एक पत्नी की तलाक को पलटने की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि 18 वर्षों तक पति से अलग रहना पति के प्रति क्रूरता के समान है।
वकीलों का विरोध प्रदर्शन
अदालत परिसर में कानूनी तनाव भी देखने को मिला, जब वकीलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों का आरोप है कि 'सिस्टमैटिक इंफॉर्मेशन रिट्रीवल' (SIR) सिस्टम के माध्यम से लगभग 13 करोड़ नागरिकों के नाम चुनावी सूची से हटा दिए गए हैं।