पटना के जयप्रभा मेदांता अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर उठे गंभीर सवाल

पटना का जयप्रभा मेदांता अस्पताल चिकित्सा खर्च, मरीजों की शिकायतों और इलाज में लापरवाही के आरोपों को लेकर जांच के घेरे में आ गया है। यह स्थिति बिहार सरकार के पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है, जिसे सरकार अपने विकास का आधार मानती है। कंकड़बाग में करीब 7 एकड़ में फैला यह अस्पताल सरकार और मेदांता के बीच साझेदारी से बना है।
साझेदारी की पूरी प्रक्रिया
इस प्रोजेक्ट के लिए अपोलो और मेदांता ने बोली लगाई थी। अपोलो ने 51 लाख रुपये सालाना प्रीमियम की पेशकश की थी, जबकि मेदांता ने 3 करोड़ रुपये सालाना का भुगतान करने का वादा करके प्रोजेक्ट हासिल किया। सरकार ने इस जमीन के लिए 33 साल का लीज समझौता किया है। इस अनुबंध में गरीबों की सुरक्षा के लिए नियम बनाए गए हैं, जिसके तहत 25 प्रतिशत बेड गरीब मरीजों के लिए आरक्षित रखने हैं।
जमीनी हकीकत और सवाल
बिहार विधान परिषद के सदस्यों ने यह चिंता जताई है कि क्या गरीब नागरिकों को 25 प्रतिशत आरक्षण का वास्तव में लाभ मिल रहा है। मरीजों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने शिकायत की है कि इन आरक्षित सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल है। मेदांता के प्रतिनिधियों का कहना है कि अस्पताल सभी अनुबंधों का सख्ती से पालन करता है और हजारों मरीजों का इलाज किया गया है।