पटना में मतदाता सूची पर संग्राम: CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र सड़कों पर

पटना के गांधी मैदान में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को उस वक्त भारी हंगामा देखने को मिला, जब अखिल भारतीय छात्र संगठन (AISA) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और बिहार तथा पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग उठाई।
पुलिस के साथ तीखी झड़प और गिरफ्तारियां
प्रदर्शन के दौरान माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब छात्र संगठन के कार्यकर्ता लोक भवन की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हो गई। इस संघर्ष के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें लेफ्ट विधायक संदीप सौरभ भी शामिल हैं।
मतदाता सूची में गड़बड़ी का गंभीर आरोप
AISA की प्रदेश उपाध्यक्ष सबा आफरीन ने चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं, जिससे उनके मताधिकार के छिनने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी गठबंधन 'INDIA bloc' ने इस मुद्दे को अदालत तक पहुंचा दिया है। सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी के नेतृत्व में 11 नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं:
- मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर और अनियमित तरीके से नाम हटाना।
- मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना निर्णय लेना।
- मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका में 14 प्रक्रियात्मक खामियों की ओर इशारा किया है, लेकिन यह मामला चुनावी पारदर्शिता को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव को स्पष्ट करता है।
देशभर में बढ़ रहा है दबाव
चुनाव आयोग पर दबाव केवल बिहार तक सीमित नहीं है। केरल विधानसभा ने भी 12 अक्टूबर को एक प्रस्ताव पारित कर मतदाता सूची की निष्पक्षता को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है। इसके साथ ही, दिल्ली में भी प्रदर्शनों को लेकर प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है, जहां जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है।