किसानों को पानी या डेटा सेंटर को? पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र सरकार को घेरा

Ghazala Saheb27 September 20262 min read0 viewsBihar
किसानों को पानी या डेटा सेंटर को? पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र सरकार को घेरा

महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने पूछा है कि संकट के इस दौर में पानी पर पहला हक किसका होना चाहिए—परेशान किसानों का या तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर उद्योग का?

सूखे की मार और डेटा सेंटर का विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित कर दिया है, जो राज्य के लगभग 74 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। यह स्थिति खरीफ सीजन के दौरान कम बारिश और लंबे सूखे के कारण पैदा हुई है।

पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ जहां राज्य का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र आक्रामक रूप से अपने डेटा-सेंटर बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य ने डेटा सेंटरों के लिए 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश में रुचि दिखाई है और 2032 तक 5.7 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य रखा है।

पानी के उपयोग पर उठे गंभीर सवाल

खेड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि डेटा सेंटरों को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है, जो मुख्य रूप से कूलिंग तकनीक पर निर्भर करता है। उन्होंने सरकार की उस योजना का भी जिक्र किया जिसमें नगर निगमों द्वारा उपचारित (treat) किए गए सीवेज पानी को उद्योगों और डेटा सेंटरों को बेचने की तैयारी है।

"जब महाराष्ट्र का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा आधिकारिक तौर पर सूखे के अंतर्गत है, तो सरकार के पास क्या योजना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य के जल संसाधनों को किसानों और आम नागरिकों से हटाकर डेटा-सेंटर विस्तार की ओर न मोड़ दिया जाए?"

उन्होंने आगे सवाल उठाया कि यदि सरकार

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