पावापुरी महोत्सव: दिगम्बर और श्वेताम्बर का संगम, डीएम ने की समीक्षा
पावापुरी महोत्सव में दिगम्बर और श्वेताम्बर जैन श्रद्धालुओं की सहभागिता होगी। डीएम ने सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिए कड़े निर्देश।

नालंदा जिले के पावापुरी में आगामी 7 और 8 नवंबर को आयोजित होने वाले पावापुरी महोत्सव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इस भव्य महोत्सव में दिगम्बर और श्वेताम्बर, दोनों ही जैन संप्रदायों के श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में सहभागिता रहेगी। महोत्सव की व्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी (डीएम) ने बुधवार को विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
महोत्सव का पूरा कार्यक्रम और विशेष आकर्षण
इस वर्ष का महोत्सव काफी खास होने वाला है क्योंकि इसमें दोनों प्रमुख जैन संप्रदायों के कार्यक्रम शामिल किए गए हैं। महोत्सव की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:
- 7 नवंबर: यह महोत्सव का मुख्य दिन होगा। इस दिन दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों द्वारा लगभग डेढ़ किलोमीटर की भव्य पदयात्रा निकाली जाएगी। साथ ही, इस अवसर पर राज्यपाल के आगमन की भी संभावित सहमति प्राप्त हुई है।
- 8 नवंबर: इस दिन विभिन्न जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
- 8 और 9 नवंबर: श्वेताम्बर जैन धर्मावलंबियों के विशेष कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
प्रशासन का निर्देश: स्वच्छता और रोशनी पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने महोत्सव स्थल का स्वयं भ्रमण किया और नगर पंचायत पावापुरी को स्पष्ट निर्देश दिए कि आयोजन स्थल पर समतलीकरण और साफ-सफाई का काम समय से पूरा कर लिया जाए।
"आयोजन स्थल पर कहीं भी पानी का जमाव नहीं होना चाहिए। परिसर पूरी तरह व्यवस्थित और स्वच्छ रहे, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए।"
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं:
- प्रकाश व्यवस्था: पावापुरी मोड़ से लेकर जल मंदिर तक के मार्ग पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को अविलंब ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।
- मूलभूत सुविधाएं: श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शौचालय, मंच निर्माण और बैरिकेडिंग की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी।
- सुरक्षा और विधि-व्यवस्था: भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।
डीएम ने विभिन्न समितियों के सदस्यों को समन्वय बनाकर कार्यों को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है ताकि महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।