पिपरा के दुर्गा मंदिर में बंगाली परंपरा का संगम, जानें क्या है खास

Ghazala Saheb18 October 20262 min read0 viewsBihar
पिपरा के दुर्गा मंदिर में बंगाली परंपरा का संगम, जानें क्या है खास

सुपौल जिले के पिपरा बाजार स्थित सुभाष चौक का दुर्गा मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत और अनूठी बंगाली पूजा पद्धति के लिए पूरे क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। शारदीय नवरात्र के अवसर पर यहाँ माँ दुर्गा की पूजा पूरी तरह से बंगाली रीति-रिवाजों के साथ संपन्न की जाती है। इस विशिष्ट परंपरा को देखने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं।

1958 से पहले का ऐतिहासिक सफर

इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली है। मंदिर प्रबंधन से जुड़ी जानकारियों के अनुसार, वर्ष 1958 से पहले यहाँ एक कच्चे घर में दुर्गा मंदिर स्थापित था। बाद में इसे हटाकर एक भव्य पक्के मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर के इस पक्के निर्माण में मधुसूदन डे और शारदा प्रसाद डे की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। तभी से यहाँ बंगाली पद्धति से पूजा करने की परंपरा निरंतर चली आ रही है।

बंगाली रीति-रिवाजों की अनूठी झलक

पिपरा के इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पूजा सामग्री और विधि है। यहाँ माँ दुर्गा की प्रतिमा के लिए आवश्यक अंग-वस्त्र और आभूषण सहित अन्य पूजन सामग्री सीधे बंगाल से मंगाई जाती है। पूजा का संपूर्ण संचालन बंगाली पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया जाता है।

यहाँ की कुछ प्रमुख परंपराएं इस प्रकार हैं:

  • छठे दिन: बेल वृक्ष के नीचे कलश की स्थापना की जाती है।
  • सप्तमी: केले के पौधे को स्नान कराकर उसे धोती पहनाई जाती है और फिर विधि-विधान के साथ उसे पास के पोखर तक ले जाया जाता है।
  • अष्टमी: इस दिन कुंवारी कन्याओं की विशेष पूजा की जाती है और उन्हें वस्त्र भेंट किए जाते हैं।

पशु बलि के स्थान पर झींगे की परंपरा

इस मंदिर में पूजा पद्धति की एक और अनोखी विशेषता यहाँ की बलि परंपरा है। यहाँ निशा और वैष्णव पद्धति के रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। पारंपरिक पशु बलि के स्थान पर यहाँ झींगे को प्रतीकात्मक बलि के रूप में अर्पित किया जाता है। इसके अलावा, बंगाली महिलाएं अपने घरों से विशेष रूप से तैयार किया गया प्रसाद मंदिर लाती हैं, जिसे माँ को भोग लगाया जाता है।

तैयारियों में जुटा मंदिर प्रबंधन

दुर्गा पूजा के सफल आयोजन के लिए मंदिर कमेटी और स्थानीय युवक संघ के सदस्य पूरी तरह सक्रिय हैं। मंदिर की सजावट और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। कमेटी में अध्यक्ष बद्री प्रसाद गुप्ता, सचिव शंकर चौधरी और निताय डे सहित अन्य सदस्य तैयारियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

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