AI से नौकरियां खत्म नहीं, बल्कि बढ़ेंगी: पीयूष गोयल का बड़ा दावा

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच एक बेहद सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में एआई तकनीक नौकरियों को कम करने के बजाय, वास्तव में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। गोयल ने यह बात श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में 'विकसित भारत के पथ' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए कही।
कौशल विकास से आएगी नई क्रांति
पीयूष गोयल ने स्वीकार किया कि एआई के आने से कार्यक्षेत्रों के स्वरूप में बदलाव आएगा, जिससे शुरुआत में कुछ अनिश्चितता पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा, "जब तक हम युवा भारत को एजेंट डेवलपर्स और साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ बनाने के लिए प्रशिक्षित नहीं कर लेते, तब तक कुछ समय के लिए बदलाव की स्थिति बनी रह सकती है।"
मंत्री ने जोर देकर कहा कि तकनीक के इस दौर में युवाओं को डरने के बजाय नई स्किल्स सीखने पर ध्यान देना चाहिए। एआई के माध्यम से भारत की उत्पादकता, दक्षता और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता में भारी सुधार होगा।
आईटी क्रांति जैसा होगा बड़ा बदलाव
एआई के प्रभाव की तुलना 1990 और 2000 के दशक में भारत में आई सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्रांति से करते हुए गोयल ने कहा कि उस समय भी दुनिया भर में विकसित तकनीक को अपनाकर भारत ने जबरदस्त लाभ उठाया था। उन्होंने कहा कि अब समय है कि भारत खुद एआई-आधारित समाधान विकसित करे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) को अब ऐसे 'एजेंट्स' में बदलना होगा जो आम लोगों के लिए व्यावहारिक रूप से उपयोगी हो सकें। इससे न केवल काम करने का तरीका बदलेगा, बल्कि उच्च वेतन वाली नौकरियों की संख्या में भी वृद्धि होगी।
इन क्षेत्रों में सुरक्षित रहेगा मानव श्रम
एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच गोयल ने उन क्षेत्रों की भी पहचान की जहाँ मानवीय अनुभव और स्पर्श की आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन, खेल और सेवा क्षेत्र जैसे क्षेत्र, जिनमें मानवीय संवेदनाएं और अनुभव शामिल हैं, एआई की पहुंच से बाहर रहेंगे और वहां रोजगार के अवसर निरंतर बने रहेंगे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का बढ़ता कद
वैश्विक व्यापार और निवेश के बदलते पैटर्न पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि दुनिया अब 'रेज़िलिएंट सप्लाई चेन' और भरोसेमंद साझेदारों की तलाश कर रही है। भारत इस बदलाव का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने विश्वास जताया कि अपनी युवा आबादी, बढ़ते बाजार और तकनीकी क्षमताओं के दम पर भारत अगले 20 से 25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।