भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों को नहीं होगा नुकसान: पीयूष गोयल
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता किसानों के हितों को सुरक्षित रखेगा और देश को वैश्विक बाजार में मजबूती देगा।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच होने वाले संभावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर उठ रहे सवालों का पुरजोर जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते से भारतीय किसानों या किसी भी अन्य हितधारक के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ISID-IDRA चौथी राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि जब इस समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक होगा, तो भारत के लोग इसे एक बड़ी जीत के रूप में देखेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह डील भारत को वैश्विक बाजार में एक मजबूत तुलनात्मक लाभ (comparative advantage) प्रदान करेगी।
किसानों और हितधारकों के हितों की सुरक्षा
पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि अब तक भारत ने जितने भी मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, उनमें कोई बड़ी खामी या गंभीर आलोचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते के विवरण सामने आने के बाद, भारत के लोग यह देखकर खुश होंगे कि हमारे किसानों या किसी भी अन्य हितधारक के संवेदनशील हितों से समझौता नहीं किया गया है। इसके विपरीत, भारत एक बहुत मजबूत स्थिति में खड़ा होगा।"
वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती पहुंच
मंत्री ने भारत की व्यापारिक नीतियों में आए बड़े बदलावों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत ने अब तक 9 व्यापार समझौतों के माध्यम से 60 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं तक तरजीही बाजार पहुंच सुरक्षित कर ली है।
उन्होंने तुलना करते हुए बताया:
- 2014 से पहले की स्थिति: व्यापार समझौतों के माध्यम से केवल 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच थी।
- वर्तमान उपलब्धि: 9 समझौतों के जरिए अब 60 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच सुनिश्चित की जा चुकी है।
गोयल ने आगे कहा कि 2014 से पहले किए गए समझौते ज्यादातर उन देशों के साथ थे जो भारत के साथ प्रतिस्पर्धा में थे, जबकि वर्तमान समझौते उन देशों के साथ हैं जो हमारे पूरक हैं और हमारे विकास में मदद करते हैं।
RCEP और व्यापारिक रणनीतियां
क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि जब RCEP लॉन्च किया गया था, तब भारत उस तस्वीर में शामिल नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की रणनीति अब उन बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने की है जो विकास के नए अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ बातचीत के सक्रिय चरण में था और उस समय न्यूजीलैंड के साथ हमारा द्विपक्षीय व्यापार काफी सीमित था।