"भारत का दृष्टिकोण अलग है": टनल बोरिंग मशीन पर बोले पीयूष गोयल
पीयूष गोयल ने कहा कि अगर विदेशी कंपनियां टनल बोरिंग मशीन नहीं देंगी, तो भारत खुद बनाएगा। दुर्लभ तत्वों के बिना मोटर बनाने पर भी जोर।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विदेशी आपूर्तिकर्ता भारत को टनल बोरिंग मशीन (TBM) उपलब्ध कराने से इनकार करते हैं, तो भारत अपनी तकनीक खुद विकसित करेगा। गोयल ने देश की विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने और अन्य देशों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भारत के दृढ़ संकल्प पर जोर दिया।
चीन और तकनीक पर कड़ा रुख
दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में 'यंग लीडर्स डिस्कोर्स फोरम' को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, "टनल बोरिंग मशीन के मामले में भारत का दृष्टिकोण अलग है। कई अन्य देश शायद समझौतों के सामने झुक जाएं, लेकिन हम ऐसा नहीं चाहते। हम किसी के साथ संबंध खराब नहीं करना चाहते; आज भी चीन के साथ हमारे संबंध अच्छे हैं। लेकिन अगर वे टनल बोरिंग मशीन देने से मना करते हैं, तो हम उन्हें भारत में ही विकसित करेंगे।"
दुर्लभ तत्वों (Rare Earths) के बिना नवाचार
मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत अब महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए बाहरी दुनिया के सामने हाथ फैलाने के बजाय वैकल्पिक समाधान ढूंढ रहा है। उन्होंने कहा, "जब दुर्लभ तत्वों (Rare Earths) को लेकर प्रतिबंध लगाए गए, तो हम हाथ नहीं फैला रहे थे। हमने इस क्षेत्र के विभिन्न स्टार्टअप्स के साथ बैठक की। क्या हम दुर्लभ तत्वों पर निर्भर हुए बिना अपने खुद के मोटर नहीं बना सकते? कुछ भारतीय स्टार्टअप्स ने पहले ही ऐसे मोटर बनाना शुरू कर दिया है जो बिना दुर्लभ तत्वों के भी समान गुणवत्ता और दक्षता प्रदान करते हैं।"
व्यापार रणनीति: आक्रामक और संवेदनशील क्षेत्र
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति दो मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- आक्रामक क्षेत्र (Offensive Sectors): भारत उन क्षेत्रों में बाजार पहुंच चाहता है जहां हम मजबूत हैं, जैसे कपड़ा, प्रोसेस्ड फूड, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, रत्न, आभूषण और फार्मास्यूटिकल्स।
- संवेदनशील क्षेत्र (Sensitive Sectors): भारत कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलने को लेकर बहुत सतर्क है।
किसानों और MSMEs के हितों की रक्षा
गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत ने कभी भी अपने संवेदनशील हितों से समझौता नहीं किया है। उन्होंने कहा, "हम जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) उत्पादों को भारत में आने देने के प्रति बहुत संवेदनशील हैं ताकि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं का सम्मान बना रहे। हमने अपने किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की रक्षा के लिए हमेशा कड़े कदम उठाए हैं।"