पीयूष गोयल का मंत्र: 'सिर्फ देश नहीं, पूरी दुनिया के लिए बनाएं भारतीय ब्रांड'
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने युवाओं को घरेलू बाजार से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर भारतीय ब्रांड बनाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने का आह्वान किया।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने देश के युवा उद्यमियों को एक बड़ा विजन दिया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारतीय उद्यमी केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले 'वर्ल्ड क्लास' भारतीय ब्रांड बनाने का लक्ष्य रखें।
दिल्ली में आयोजित 'फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' के दौरान गोयल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति का अगला चरण उन उद्यमियों द्वारा संचालित होगा जिनका दृष्टिकोण वैश्विक होगा और जिनमें विश्व स्तरीय ब्रांड बनाने का जुनून होगा।
स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग से बढ़ेंगे अवसर
संजीव सान्याल के साथ एक चर्चा के दौरान, गोयल ने बताया कि भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं और नए मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) युवाओं के लिए बड़े अवसर लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमियों को मैन्युफैक्चरिंग, डीप टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यू सेवाओं जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशनी चाहिए।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक वैल्यू चेन के साथ भारत का बढ़ता जुड़ाव न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने का मौका देता है, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है।
ओडिशा के विकास पर भी दिया जोर
दिल्ली के बाद, पीयूष गोयल 'बिजनेस ओडिशा कॉन्क्लेव' में भी शामिल हुए। वहां उन्होंने ओडिशा के मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने की क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के बढ़ते व्यापारिक साझेदारों और FTAs का लाभ उठाकर ओडिशा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहुंच बना सकता है। इस अवसर पर मंत्री ने उत्कृष्ट नेताओं, उद्यमों और ब्रांडों को सम्मानित भी किया।
सफलता के लिए क्या है जरूरी?
ग्लोबल ब्रांड बनाने की राह में गोयल ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए:
- गुणवत्ता मानक: अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता बनाए रखना अनिवार्य है।
- अनुसंधान और विकास (R&D): व्यवसायों को नई तकनीक और रिसर्च में निवेश बढ़ाना चाहिए।
- कौशल विकास: उद्योग की जरूरतों के अनुसार कौशल विकसित करना जरूरी है।
- निर्यात उन्मुख दृष्टिकोण: केवल स्थानीय बिक्री नहीं, बल्कि निर्यात पर ध्यान केंद्रित करें।
उन्होंने उद्यमियों को जोखिम लेने और नवाचार (Innovation) के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकें।