गुजरात से राष्ट्र निर्माण तक: पीएम मोदी के 25 वर्षों का गौरवशाली सफर

7 अक्टूबर 2001 का वह दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। उस समय गुजरात एक विनाशकारी भूकंप की त्रासदी से जूझ रहा था और राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों के खोए हुए आत्मविश्वास को फिर से जगाना और पुनर्निर्माण करना था। पिछले 25 वर्षों में, मोदी का यह सफर एक राज्य के कायाकल्प से शुरू होकर पूरे राष्ट्र के निर्माण तक पहुँच गया है।
गुजरात में विकास का नया मॉडल
मुख्यमंत्री के रूप में अपने 13 साल के कार्यकाल (2001-2014) के दौरान, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के विकास की दिशा बदल दी। उन्होंने केवल बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक विकास पहुँचाने पर जोर दिया। उनके नेतृत्व में प्रमुख क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति देखी गई:
- बुनियादी ढांचा: सड़कों, बिजली, पानी और उद्योगों का तेजी से विस्तार।
- शिक्षा और कृषि: शाला प्रवेशोत्सव और कृषि महोत्सव जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनभागीदारी सुनिश्चित की गई।
- सुशासन (Good Governance): तकनीक का उपयोग करते हुए 'SWAGAT' जैसी पहल शुरू की गई, जिससे नागरिक सीधे सरकार तक अपनी शिकायतें पहुँचा सके।
- निवेश का केंद्र: 'वाइब्रेंट गुजरात' के माध्यम से गुजरात को वैश्विक निवेश के मानचित्र पर स्थापित किया गया।
उनके शासन का आधार 'पंचामृत विजन' था, जिसमें जन शक्ति, जल शक्ति, ज्ञान शक्ति, ऊर्जा शक्ति और रक्षा शक्ति को विकास के मुख्य स्तंभ माना गया।