पीएम मोदी ने दी दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं, मां महागौरी से की सबके उज्ज्वल भविष्य की कामना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुर्गा अष्टमी और महा नवमी के पावन अवसर पर देशवासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, सफलता और कल्याण की कामना की है। इस पवित्र उत्सव के दौरान देश के प्रमुख नेताओं ने भी मां दुर्गा के आशीर्वाद और देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की है।
मां महागौरी से उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना
नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान, मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने मां दुर्गा के आठवें स्वरूप, मां महागौरी की आराधना की। मां महागौरी को पवित्रता, तपस्या और शांति का प्रतीक माना जाता है।
“त्याग और तपस्या की देवी मां महागौरी का आशीर्वाद सभी के भविष्य को रोशन करे। जीवन में हर कोई कीर्ति और गौरव प्राप्त करे—यही हमारी हार्दिक इच्छा है।”
प्रधानमंत्री ने यह संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा किया।
अमित शाह और राजनाथ सिंह ने भी दी बधाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश में सद्भाव, शांति और सभी नागरिकों के कल्याण की कामना की।
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महा नवमी के अवसर पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की। मां सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियों, दिव्य ज्ञान और पूर्णता प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
“जय मां सिद्धिदात्री! सभी सिद्धियों और दिव्य ज्ञान की प्रदाता मां सिद्धिदात्री के चरणों में कोटि-कोटि नमन। महा नवमी के इस पावन पर्व पर हम मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं कि वे हमें सच्ची बुद्धि, विवेक, विनम्रता और नेक कार्यों की प्रेरणा दें। हमारी प्रत्येक उपलब्धि विश्व के कल्याण का माध्यम बने।”
मंत्र के साथ की गई प्रार्थना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी प्रार्थना में मां सिद्धिदात्री को समर्पित एक पवित्र संस्कृत मंत्र का भी उल्लेख किया:
“विश्वकर्ता विश्वभर्तृ विश्वहर्तृ विश्वप्रीता। विश्वर्चिता विश्वतीता सिद्धिदात्री नमोऽस्तु ते॥”
दुर्गा पूजा का महत्व और परंपरा
दुर्गा पूजा, जिसे दुर्गात्सव या शारदोत्सव भी कहा जाता है, मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला एक वार्षिक उत्सव है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस समय देवी अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आती हैं। यह उत्सव दसवें दिन विजयदशमी (दशहरा) के साथ समाप्त होता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।