अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी: पीएम मोदी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

Prakriti Singh28 September 20262 min read0 viewsDharm
अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी: पीएम मोदी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल की अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने सिंघल के संगठनात्मक कार्यों और सामाजिक एकता में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित था।

"वृक्ष कबाहूँ नहीं फल भखै, नदी न संचै नीर। परार्थ के करने, साधु धरा शरीर"

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश की शुरुआत एक सुंदर दोहे से की, जिसका अर्थ है कि पेड़ अपने फल खुद नहीं खाता और न ही नदी अपना पानी खुद संचय करती है; दोनों का अस्तित्व दूसरों के लाभ के लिए होता है। पीएम मोदी ने कहा कि अशोक सिंघल जी के जीवन में यह भावना निरंतर झलकती थी।

एक समर्पित व्यक्तित्व और कुशल संगठनकर्ता

पीएम मोदी ने अशोक सिंघल के व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए उन्हें दृढ़ विश्वास वाला और सादगी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सिंघल ने आध्यात्मिक प्रतिबद्धता को अथक संगठनात्मक कार्य और सामाजिक एकता के प्रति अटूट समर्पण के साथ जोड़ा था।

प्रधानमंत्री ने सिंघल के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को साझा करते हुए बताया:

  • 1981 का अनुभव: पीएम मोदी ने बताया कि जब वे एक युवा कार्यकर्ता थे, तब उन्हें अशोक सिंघल का एक हस्तलिखित पत्र मिला था, जो उनके लिए एक यादगार क्षण था।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में कार्य: सिंघल ने गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों सहित देश के सबसे दुर्गम इलाकों की यात्रा की और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए काम किया।
  • आपदा में अग्रिम पंक्ति में: 2001 के कच्छ भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वे हमेशा सहायता कार्यों का मार्गदर्शन करने वाले पहले व्यक्ति होते थे।

वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति का प्रसार

अशोक सिंघल ने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदू समाज को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पीएम मोदी ने उनके संगठनात्मक कौशल का उल्लेख करते हुए कुछ प्रमुख घटनाओं को याद किया:

  1. 1993 का अमेरिका सम्मेलन
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