सुपौल: पीएम विश्वकर्मा योजना से अब चमकेगा पारंपरिक कारीगरों का भाग्य
सुपौल में पीएम विश्वकर्मा योजना पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित। कारीगरों को डिजिटल मार्केटिंग और आधुनिक तकनीक से वैश्विक बाजार तक पहुंचने के गुर सिखाए गए।

सुपौल के जिला उद्योग केंद्र में गुरुवार को पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के भविष्य को संवारने के लिए एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत एमएसएमई-डीएफओ, मुजफ्फरपुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत एमएसएमई-डीएफओ के अन्वेषक भीमसेन, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक मनोज कुमार और अग्रणी जिला प्रबंधक बागेश कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की।
डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स से मिलेगी वैश्विक पहचान
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कारीगरों को बताया कि कैसे वे अपने पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढाल सकते हैं। चर्चा का मुख्य केंद्र उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रभावी मार्केटिंग रहा। कारीगरों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में विस्तार से समझाया गया:
- ब्रांडिंग और पहचान: अपने उत्पादों की एक अलग ब्रांड इमेज कैसे बनाएं।
- गुणवत्ता में सुधार: बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्पादों की क्वालिटी को बेहतर बनाना।
- डिजिटल माध्यम: डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग करके बिक्री बढ़ाना।
बदलते समय की जरूरतों को देखते हुए, कारीगरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि वे अपने व्यवसाय को और अधिक उन्नत बना सकें।
आर्थिक मजबूती और स्वरोजगार को बढ़ावा
केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि वित्तीय सहायता के मामले में भी कारीगरों को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। लाभार्थियों को योजना के तहत मिलने वाली ऋण सुविधाओं, वित्तीय सहायता और बैंकिंग प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने कारीगरों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों और प्रभावी मार्केटिंग के जरिए वे अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकते हैं। इस योजना का मुख्य लक्ष्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।