बेटियों की सुरक्षा के लिए 'पुलिस दीदी' ने थामी कमान, छात्राओं को सिखाए बचाव के मंत्र

Ghazala Saheb12 October 20262 min read0 viewsBihar
बेटियों की सुरक्षा के लिए 'पुलिस दीदी' ने थामी कमान, छात्राओं को सिखाए बचाव के मंत्र

बिहार में बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर शुरू किए गए ‘पुलिस दीदी कार्यक्रम’ के तहत अब स्कूलों में जाकर छात्राओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

बेलवा काशीपुर स्कूल में जागरूकता और काउंसलिंग

इसी कड़ी में सोमवार को किशनगंज जिले के उच्च माध्यमिक विद्यालय, बेलवा काशीपुर में एक महत्वपूर्ण जागरूकता एवं काउंसलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में महिला थानाध्यक्ष सुनीता कुमारी ने विद्यालय की छात्राओं से सीधा संवाद किया और उन्हें सुरक्षा से जुड़े अहम पहलुओं की जानकारी दी।

सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, अधिकारों की जानकारी भी है जरूरी

कार्यक्रम के दौरान महिला थानाध्यक्ष ने छात्राओं को बहुत ही सरल भाषा में समझाया कि पुलिस दीदी कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सुरक्षा मुहैया कराना ही नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य किशोरियों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाना है ताकि वे अपनी समस्याओं को बिना किसी झिझक के रख सकें।

छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए:

  • हिम्मत न हारें: किसी भी प्रकार की परेशानी, असुरक्षा या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहना समाधान नहीं है।
  • मदद मांगें: छात्राओं को चाहिए कि वे अपने भरोसेमंद लोगों और पुलिस से बिना डरे सहायता लें।
  • आत्मविश्वास रखें: पुलिस आपकी सुरक्षा, सहायता और मार्गदर्शन के लिए हमेशा तत्पर है।

डर और झिझक को खत्म करने की पहल

इस कार्यक्रम का एक बड़ा उद्देश्य छात्राओं के मन से पुलिस का डर और सामाजिक झिझक को दूर करना है। काउंसलिंग के माध्यम से छात्राओं को यह भरोसा दिलाया गया कि पुलिस उनके साथ एक मित्र और मार्गदर्शक की तरह खड़ी है।

"सुरक्षित बेटी, सशक्त बेटी — यही पुलिस दीदी कार्यक्रम का संकल्प है।"

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि बेटियों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। पुलिस और छात्राओं के बीच इस तरह के संवाद से एक सुरक्षित वातावरण तैयार होगा, जिससे किशोरियां निर्भीक होकर अपने सपनों को पूरा कर सकेंगी।

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