प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान: 10 हजार बेरोजगारों को मिलेगी प्राइवेट नौकरी

Ghazala Saheb19 October 20262 min read0 viewsBihar
प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान: 10 हजार बेरोजगारों को मिलेगी प्राइवेट नौकरी

अररिया में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान सामने आया है। कोसी स्नातक क्षेत्र के मतदाताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने सीमांचल के युवाओं के लिए रोजगार की एक बड़ी योजना साझा की। प्रशांत किशोर ने मतदाताओं से अपील की कि वे 25 वर्षों से सत्ता में काबिज भाजपा को हराने और जन सुराज के प्रत्याशी रजनीश रंजन की जीत सुनिश्चित करने के लिए वोट दें।

रजनीश रंजन की जीत पर नौकरियों का तोहफा

प्रशांत किशोर ने चुनावी वादे को धार देते हुए कहा कि यदि जन सुराज के प्रत्याशी रजनीश रंजन की जीत होती है, तो वह सीमांचल के 10 हजार शिक्षित बेरोजगारों को प्राइवेट नौकरी दिलवाने का काम करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों और स्नातकों के अधिकारों की बात करते हुए सातवें वेतनमान को लागू करवाने की मांग भी उठाई।

भाजपा और बाहरी राजनीति पर तीखा हमला

बैठक में प्रशांत किशोर ने भाजपा पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 25 वर्षों से भाजपा के लोग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव 'चोरी' से जीतते रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AIMIM या हैदराबाद और गुजरात से आए लोग बिहार और सीमांचल की तकदीर नहीं बदल सकते; सीमांचल की किस्मत बदलने का काम केवल वहां के स्थानीय लोग ही कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने गुजरात की जितनी चिंता की, उसका एक पैसा भी बिहार के विकास के लिए नहीं खर्च किया।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने देश की संवैधानिक संस्थाओं, विशेषकर चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पिछले 8 से 10 वर्षों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा है। उन्होंने निम्नलिखित मुद्दों को उठाया:

  • मतदाता सूची में गड़बड़ी: एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के नाम कटवाना।
  • चुनाव प्रक्रिया में बदलाव: फॉर्म 6 और 7 में बदलाव और चुनाव की तिथियों का संदिग्ध निर्धारण।
  • मतदाताओं को प्रभावित करना: एमएलसी का चुनाव रविवार के बजाय शुक्रवार को करना, ताकि मुस्लिम मतदाता वोट न दे सकें।
  • धनबल का प्रयोग: पिछले विधानसभा चुनाव में सरकार द्वारा वोट खरीदने के लिए भारी खर्च किया जाना।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संवैधानिक संस्थाएं ईमानदारी से कार्य नहीं करेंगी, तो जनता को सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा।

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