राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चार देशों के राजदूतों का किया स्वागत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने माली, म्यांमार, मेडागास्कर और इक्वेटोरियल गिनी के राजदूतों का स्वागत किया और कलाकारों से मुलाकात की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में एक गरिमामय समारोह के दौरान चार अलग-अलग देशों के नए राजदूतों से उनके आधिकारिक प्रमाण पत्र स्वीकार किए। इस औपचारिक प्रक्रिया के माध्यम से माली, म्यांमार, मेडागास्कर और इक्वेटोरियल गिनी के राजनयिकों ने भारत में अपने आधिकारिक मिशन की शुरुआत की है।
इन चार देशों के राजदूतों ने पेश किए प्रमाण पत्र
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन राजदूतों ने अपने संबंधित देशों के प्रमुखों की ओर से राष्ट्रपति को अपने विश्वास पत्र (Letters of Credence) सौंपे। समारोह में शामिल राजदूतों का विवरण इस प्रकार है:
- एच.ई. फातोमा थेरा: माली गणराज्य की राजदूत
- एच.ई. यू एये मिन ह्ते: म्यांमार गणराज्य के राजदूत
- एच.ई. मंडेहात्सर जॉर्जेट: मेडागास्कर गणराज्य की राजदूत
- एच.ई. मिगुएल एडजांग एंगु: इक्वेटोरियल गिनी गणराज्य के राजदूत
यह एक पारंपरिक राजनयिक प्रक्रिया है, जिसके तहत राजदूतों को उनके देशों के आधिकारिक प्रतिनिधियों के रूप में भारत सरकार के समक्ष मान्यता प्रदान की जाती है।
'विकसित भारत' थीम पर कलाकारों से संवाद
राजनयिक कार्यक्रमों के अलावा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पारंपरिक और लोक कलाकारों से भी मुलाकात की। ये कलाकार 'आर्टिस्ट्स-इन-रेसिडेंस' कार्यक्रम के तहत वर्तमान में राष्ट्रपति भवन में ही प्रवास कर रहे हैं।
इन कलाकारों ने 'विकसित भारत' विषय पर आधारित अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। इन रचनाओं में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के लक्ष्यों का एक अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकृतियों में आधुनिक शहरों, बुनियादी ढांचे, पवन टर्बाइनों और टिकाऊ ऊर्जा जैसे समकालीन विषयों को पारंपरिक कला शैलियों के साथ खूबसूरती से उकेरा गया है।
विविध कला शैलियों का प्रदर्शन
इस कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने भारत की कई पारंपरिक कला विधाओं को प्रदर्शित किया, जिनमें शामिल हैं:
- ऐपण (Aipan)
- कलमकारी (Kalamkari)
- माता नी पचेड़ी (Mata ni Pachedi)
- कवि (Kavi)
- पिचवाई (Pichwai)
- वारली (Warli)
यह 'आर्टिस्ट्स-इन-रेसिडेंस' कार्यक्रम देश की विविध क्षेत्रीय कला परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें एक नया मंच प्रदान करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।