विजयदशमी पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: 'विकसित भारत' के लिए अपनाएं सांस्कृतिक मूल्य

Prakriti Singh19 October 20261 min read0 viewsDharm
विजयदशमी पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: 'विकसित भारत' के लिए अपनाएं सांस्कृतिक मूल्य

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को विजयदशमी के पावन अवसर पर देश और विदेश में रह रहे सभी भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस अवसर पर नागरिकों से नैतिकता और कर्तव्य के सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया, ताकि एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया जा सके।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

राष्ट्रपति ने दशहरा के आध्यात्मिक और नैतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह त्योहार अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक है। उन्होंने भगवान राम का उल्लेख करते हुए कहा कि विजयदशमी का त्योहार विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह रावण पर भगवान राम की विजय को दर्शाता है। भगवान राम को नैतिकता और सदाचार के प्रतिमान के रूप में पूजा जाता है।

विकसित भारत के लिए सांस्कृतिक मूल्यों का आह्वान

राष्ट्रपति मुर्मू ने नागरिकों से भारत की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "भारतीय संस्कृति नैतिकता और कर्तव्य के आदर्शों में रची-बसी है। इस अवसर पर, आइए हम अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के नेक आदर्शों को बनाए रखने और एक समावेशी समाज एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लें।"

राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों के सुख, अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की कामना भी की। इससे पहले, उन्होंने दुर्गा पूजा के अवसर पर भी शुभकामनाएं दी थीं, जिसमें उन्होंने भारत की आध्यात्मिक विरासत और महिलाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने पर जोर दिया था।

विजयदशमी का यह पर्व समाज में व्याप्त नकारात्मकता को दूर करने और सामाजिक बुराइयों जैसे नशाखोरी, जातिगत भेदभाव और दहेज प्रथा को खत्म करने की प्रेरणा देता है।

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