"SIR प्रक्रिया से भाजपा को फायदा पहुंचाने की साजिश": प्रियंक खरगे का बड़ा आरोप

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के जरिए भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए एक करोड़ मतदाताओं को बाहर किया गया है।

Ghazala Saheb28 October 20262 min read0 viewsBihar
"SIR प्रक्रिया से भाजपा को फायदा पहुंचाने की साजिश": प्रियंक खरगे का बड़ा आरोप

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) का इस्तेमाल भाजपा को चुनावी लाभ पहुँचाने और विपक्ष को चुनावी मैदान से बाहर करने के लिए एक गहरी भाजपा साजिश के तहत किया जा रहा है। खरगे के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान लगभग एक करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है।

बिहार और पश्चिम बंगाल का भी दिया हवाला

प्रियंक खरगे ने कहा कि यह समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पैटर्न पश्चिम बंगाल और बिहार में भी बहुत स्पष्ट रूप से देखा गया था, और अब यह कर्नाटक में भी तेजी से उभर रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ खास वर्गों को चुनावी प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह बाहर रखने के लिए जानबूझकर ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।

फर्जी फॉर्म-7 का बड़ा खेल और चार्जशीट

खरगे ने चुनावी धांधली के प्रमाण के रूप में 'फॉर्म-7' के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 की बल्क प्रिंटिंग और उसका गलत इस्तेमाल यह साबित करता है कि मतदाता सूची को "शुद्ध" करने के नाम पर कुछ लोगों को हटाया जा रहा है। उन्होंने दो प्रमुख मामलों का जिक्र किया:

  • चित्तपुर मामला: यहाँ 40 फर्जी फॉर्म-7 दिए जाने की बात सामने आई है, जिसकी शिकायत खुद एआरओ (ARO) और ईआरओ (ERO) ने की है।
  • अलंद मामला: यहाँ स्थिति और भी गंभीर थी, जहाँ 6,018 फॉर्म में से 5,994 फॉर्म फर्जी पाए गए थे। इस मामले में 22,000 पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है और अब इसका ट्रायल शुरू होगा।

मतदाता सूची में भारी गिरावट का डेटा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, SIR प्रक्रिया के बाद कर्नाटक की मतदाता सूची में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। प्रक्रिया से पहले मतदाताओं की कुल संख्या 5.54 करोड़ थी, जो अब घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई है। यह लगभग 17.92 प्रतिशत की भारी गिरावट है, जिसने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

विरोध प्रदर्शन के अधिकारों पर सरकार का रुख

इस बीच, खरगे ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नागरिकों के विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार को नहीं रोक रही है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु और राज्य के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनों के लिए नए स्थानों को अधिसूचित करने के सुझावों पर विचार किया जा रहा है, ताकि आम नागरिकों के अधिकारों और प्रदर्शनकारियों के बीच एक सही संतुलन बना रहे।

Share:

Comments

Leave a comment