"ज्ञानेश कुमार कहाँ छिपे हैं?": चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर प्रियंक खड़गे का तीखा हमला

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Ghazala Saheb27 October 20262 min read0 viewsBihar
"ज्ञानेश कुमार कहाँ छिपे हैं?": चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर प्रियंक खड़गे का तीखा हमला

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की चुप्पी पर निशाना साधते हुए पूछा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर वे जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। खड़गे ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और असहमति के पत्रों का मुद्दा उठाते हुए आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

क्या चुनाव आयोग के फैसले वाकई सर्वसम्मत थे?

प्रियंक खड़गे ने प्रेस को संबोधित करते हुए आयोग के उन दावों को चुनौती दी, जिनमें कहा गया था कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए सभी निर्णय सर्वसम्मत थे। उन्होंने कथित रूप से तीन चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों का हवाला देते हुए कहा:

"अगर निर्णय सर्वसम्मत था, तो असहमति के पत्र (dissent letters) क्यों थे? सर्वसम्मत का मतलब तो यह होता है कि हर कोई सहमत है, है न?"

खड़गे ने आरोप लगाया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के कार्यों से असहमति जताई थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक संवैधानिक प्राधिकरण की ओर से भाजपा नेता जवाब क्यों दे रहे हैं, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त खुद इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कह रहे हैं।

चुनावी सॉफ्टवेयर और 'फॉर्म 7' को लेकर बड़ी चिंता

मंत्री ने चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियों और मतदाता सूची से नाम हटाने की कोशिशों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया:

  • चुनावी सॉफ्टवेयर: उन्होंने चुनावी सॉफ्टवेयर में कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाया।
  • बल्क फॉर्म 7 का वितरण: मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए उपयोग किए जाने वाले 'फॉर्म 7' के प्री-प्रिंटेड बल्क आवेदन के वितरण पर सवाल उठाए।
  • कानूनी कार्रवाई: खड़गे ने बताया कि इन बल्क फॉर्म 7 आवेदनों के वितरण और इनके आपूर्तिकर्ताओं को लेकर मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 से संबंधित है और इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर राजनीतिक घमासान

प्रियंक खड़गे ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पटना, बिहार में दिए गए विवादित बयान पर भी भाजपा के विरोध को खारिज कर दिया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने 25 अक्टूबर को एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, "मोदी का बाप भी जाएगा"।

प्रियंक खड़गे ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा का विरोध केवल ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। उन्होंने भाजपा के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कांग्रेस नेताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, तब भाजपा चुप रहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार से जुड़े बयानों का भी जिक्र करते हुए भाजपा की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए।

इसके साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली 'INDIA bloc' की रैली और कर्नाटक के 'राज्योत्सव' के बीच कोई टकराव नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्री अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करेंगे, जबकि पार्टी कार्यकर्ता अपनी इच्छा अनुसार दोनों कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

Share:

Comments

Leave a comment