पंजाब PCS परीक्षा धांधली का आरोप, तरुण चुघ ने मांगी CBI जांच
भाजपा सांसद तरुण चुघ ने पंजाब PCS परीक्षा धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्यपाल से CBI जांच और चयन प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।

भाजपा सांसद तरुण चुघ ने पंजाब PCS परीक्षा धांधली की आशंका जताते हुए पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखा है। उन्होंने इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने और चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
चुघ ने आरोप लगाया कि पंजाब के लाखों युवाओं का भविष्य और सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता दांव पर है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक और धांधली के मामलों ने पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नतीजों में संदिग्ध पैटर्न और अनियमितताएं
4 नवंबर को घोषित हुए परिणामों के बाद उम्मीदवारों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। चुघ के अनुसार, कुछ ऐसे उम्मीदवारों का चयन किया गया है जो कथित तौर पर परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए थे। उन्होंने डेटा का हवाला देते हुए बताया कि शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में से 24.21 प्रतिशत उम्मीदवार केवल एक ही परीक्षा केंद्र से संबंधित हैं, जो बेहद संदिग्ध है।
भर्ती नियमों की अनदेखी का आरोप
सांसद ने चयन प्रक्रिया के मानदंडों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञापन में जारी पदों की संख्या के तीन गुना उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाने के निर्धारित नियम का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि 331 पदों के लिए 751 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट क्यों किया गया है?
पुराने भर्ती घोटालों का भी दिया हवाला
तरुण चुघ ने पंजाब में पहले हुए भर्ती विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने PSSSB ग्रुप-बी परीक्षा में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शीर्ष 100 उम्मीदवारों में से 22 उम्मीदवार अकेले बठिंडा जिले से थे। इसके अलावा, उन्होंने फार्मेसी ऑफिसर भर्ती में पेन कैमरा और ब्लूटूथ जैसे हाई-टेक उपकरणों के जरिए नकल के आरोपों को भी दोहराया।
युवाओं के भविष्य के लिए बड़ी मांग
चुघ ने कहा कि गरीब किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए ये परीक्षाएं केवल नौकरी नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की उम्मीद होती हैं। उन्होंने राज्यपाल से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- CBI जांच: PCS मुख्य परीक्षा के परिणामों की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए।
- प्रक्रिया पर रोक: जांच पूरी होने तक साक्षात्कार और चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
- सबूतों की सुरक्षा: प्रश्न पत्र, उत्तर पुस्तिकाएं, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित किया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि इस जांच में राज्य सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और मुख्यमंत्री व संबंधित मंत्रियों को प्रशासनिक निर्णयों से दूर रखा जाना चाहिए ताकि जांच निष्पक्ष हो सके। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे भर्ती प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल संवैधानिक कदम उठाएं।