पूर्णिया: बिरयानी और कपड़ों की दुकान में काम कर रहे दो मासूमों को कराया गया मुक्त

पूर्णिया के बैसी बाजार में प्रशासन ने छापेमारी कर बिरयानी और कपड़ों की दुकान से दो बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया।

Ghazala Saheb30 October 20262 min read0 viewsBihar
पूर्णिया: बिरयानी और कपड़ों की दुकान में काम कर रहे दो मासूमों को कराया गया मुक्त

पूर्णिया जिले के बैसी बाजार में प्रशासन और पुलिस ने बाल श्रम के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एक संयुक्त अभियान के दौरान, अधिकारियों ने दो बच्चों को अवैध रूप से काम करते हुए पाया और उन्हें तुरंत रेस्क्यू किया।

कैसे हुई छापेमारी और बच्चों का रेस्क्यू?

यह कार्रवाई 30 अक्टूबर 2026 को जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई। छापेमारी के दौरान टीम ने पाया कि एक बिरयानी की दुकान और एक रेडीमेड कपड़ों की दुकान में बच्चे काम कर रहे थे। बचाए गए इन बच्चों की उम्र लगभग 10 और 13 वर्ष बताई जा रही है।

इस सफल ऑपरेशन में श्रम प्रवर्तन अधिकारी कुणाल किशोर सिंह के साथ आदित्य प्रियदर्शी, शुभम प्रियदर्शी, अमित कश्यप और अवधेश कुमार जैसे अधिकारी शामिल थे। इस अभियान में समाजसेवी शेखर तिरकी और 'प्रयास जैक सोसाइटी' के प्रतिनिधियों ने भी स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अब कहां हैं बच्चे और क्या होगा कानूनी एक्शन?

रेस्क्यू के बाद, बच्चों को तुरंत बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया। समिति के निर्देशों का पालन करते हुए, बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कटिहार के एक बड़े आश्रय गृह (वृहद आश्रय गृह) में भेज दिया गया है।

प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि बच्चों से श्रम कराने वाले मालिकों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नियमों के तहत आर्थिक सहायता और दंड का प्रावधान

बाल श्रम के मामलों में प्रशासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू किए हैं:

  • बच्चों के लिए सहायता: बचाए गए बच्चों को 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • नियोक्ताओं पर जुर्माना: बच्चों को काम पर रखने वाले मालिकों को बाल श्रम पुनर्वास और कल्याण कोष में 5,000 रुपये जमा करने होंगे।

गौरतलब है कि बिहार में बाल श्रम को जड़ से खत्म करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्णिया क्षेत्र में भी पिछले कुछ समय में कई बच्चों को इस तरह बचाया गया है। इसके साथ ही, भागलपुर और खगड़िया जैसे जिलों में 'सुरक्षित बचपन अभियान' के माध्यम से नागरिकों को बाल अधिकारों और बाल श्रम के उन्मूलन के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

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