पूर्णिया में IIT, AIIMS और केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग, सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाई आवाज

बिहार के पूर्णिया प्रमंडल में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बड़े शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण मांग उठी है। सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट विजय कुमार श्रीवास्तव ने केंद्र और राज्य सरकार से औपचारिक रूप से आग्रह किया है कि 257 साल पुराने ऐतिहासिक जिले पूर्णिया में प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विस्तारित परिसर स्थापित किए जाएं।
श्रीवास्तव ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अतिरिक्त सचिव को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर संवेदनशीलता से विचार करने का अनुरोध किया है।
शिक्षा के मामले में पिछड़ापन और पलायन की समस्या
पूर्णिया प्रमंडल, जिसमें पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले शामिल हैं, वर्तमान में शैक्षिक पिछड़ेपन का सामना कर रहा है। श्रीवास्तव ने बताया कि जनसंख्या, भूमि क्षेत्र और सामाजिक विविधता के मामले में यह क्षेत्र बिहार का एक प्रमुख हिस्सा है, लेकिन शिक्षा के मानकों पर यह राज्य और राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है।
नीति आयोग के सूचकांकों और राष्ट्रीय शिक्षा सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए, उन्होंने साक्षरता दर, उच्च शिक्षा में नामांकन अनुपात और तकनीकी व चिकित्सा संस्थानों की भारी कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया है। इस कमी के कारण क्षेत्र की प्रतिभाओं को मजबूरन पटना, दिल्ली, वाराणसी और कोलकाता जैसे शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है।
"यह पलायन न केवल क्षेत्रीय विकास को बाधित करता है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, किसानों, अल्पसंख्यक समुदायों, दलितों, पिछड़ों और विशेष रूप से महिला छात्रों को भी प्रभावित करता है, जिससे क्षेत्र में 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) की स्थिति पैदा हो रही है।"
प्रमुख संस्थानों की स्थापना की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता ने सरकार के समक्ष कुछ विशिष्ट मांगें रखी हैं ताकि इस क्षेत्र का शैक्षिक कायाकल्प किया जा सके। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- पूर्णिया विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाए।
- पटना विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), AIIMS, IIT, NIT, IIIT और IIM के विस्तारित परिसर स्थापित किए जाएं।
- एक केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय और एक राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय की स्थापना हो।
- राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान, शिक्षक प्रशिक्षण और कौशल विकास संस्थान खोले जाएं।
रणनीतिक महत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा
श्रीवास्तव ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्णिया प्रमंडल नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के पास स्थित होने के कारण रणनीतिक, सांस्कृतिक और कृषि की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने तर्क दिया कि इस क्षेत्र में शैक्षिक विकास केवल स्थानीय जरूरत नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकीकरण, सुरक्षा और समावेशी विकास के लिए भी अनिवार्य है।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि लाखों छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में ठोस नीतिगत निर्णय लिए जाएं और बजट में आवश्यक प्रावधान किए जाएं।