पूर्णिया की वायरल लव स्टोरी का सच आया सामने, सोशल मीडिया पर फैला झूठ!

Ghazala Saheb16 October 20262 min read0 viewsBihar
पूर्णिया की वायरल लव स्टोरी का सच आया सामने, सोशल मीडिया पर फैला झूठ!

सोशल मीडिया पर इन दिनों पूर्णिया की वायरल लव स्टोरी ने तहलका मचा रखा था, जिसमें भागलपुर के 'राहुल यादव' और एक 'रूसी महिला' के बीच रोमांस की बातें कही जा रही थीं। लेकिन अब इस कहानी का पर्दाफाश हो गया है और सच कुछ और ही निकला है। यह पूरी कहानी महज एक सोची-समझी साजिश और सोशल मीडिया पर फैलाया गया एक फर्जीवाड़ा है।

कौन है असली युवक?

जिस युवक को सोशल मीडिया पर 'राहुल यादव' बताकर पेश किया जा रहा था, वह असल में पूर्णिया जिले के कसबा थाना क्षेत्र के गरहबनेली अंतर्गत बरेटा पंचायत का निवासी नमित कुमार है। नमित का भागलपुर या राहुल यादव नाम से कोई लेना-देना नहीं है।

कैसे शुरू हुआ यह फर्जीवाड़ा?

इस पूरे मामले की जड़ में एक एनजीओ (NGO) का कार्यक्रम है। 'साथी' (Saathi) नामक एक संस्था, जो ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करती है, उसने एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम के तहत आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं को बकरी बांटी जा रही थी। नमित कुमार उस समय एक कैमरा टीम के साथ सोशल मीडिया कंटेंट मैनेज कर रहे थे और उन्होंने इस कार्यक्रम का एक साधारण वीडियो शूट किया था।

वीडियो से 'लव स्टोरी' तक का सफर

नमित ने इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर बिना किसी रोमांटिक संगीत या विवादित ऑडियो के अपलोड किया था। लेकिन जैसे ही वीडियो को लाखों व्यूज मिले, कुछ अज्ञात लोगों ने इस वीडियो को डाउनलोड कर लिया और इसे गलत तरीके से पेश करना शुरू कर दिया।

  • नमित कुमार को गलत तरीके से 'भागलपुर का राहुल यादव' बताया गया।
  • एनजीओ की कर्मचारी, जो असल में इंग्लैंड की रहने वाली हैं, उन्हें उसकी 'रूसी प्रेमिका' करार दे दिया गया।

बिना किसी जांच-पड़ताल के, यह भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई।

पीड़ित युवक ने मांगी सख्त कार्रवाई

इस फर्जी कहानी के कारण नमित कुमार काफी मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पहचान का इस्तेमाल बिना उनकी सहमति के इस तरह की भ्रामक कहानी फैलाने के लिए किया गया। इस मामले में एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भी नमित पर वीडियो हटाने का दबाव बनाया।

नमित कुमार ने अब पूर्णिया के जिला मजिस्ट्रेट और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस डिजिटल उत्पीड़न और भ्रामक सामग्री फैलाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा न हो सके।

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