पूर्वांचल के बांधों का होगा कायाकल्प: सिंचाई और पेयजल के लिए मंत्री का बड़ा एक्शन प्लान!

उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वातन्त्रय देव सिंह ने पूर्वांचल क्षेत्र के बांधों और जलाशयों की स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को सुदृढ़ करना है ताकि किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सके और भूजल स्तर में सुधार हो सके।
प्रमुख जिलों पर फोकस और क्षमता बढ़ाने की तैयारी
मंत्री स्वातन्त्रय देव सिंह और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग ने मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली और प्रयागराज जिलों में स्थित बांधों, तटबंधों और जलाशयों से संबंधित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस उच्च स्तरीय बैठक में वाराणसी के चीफ इंजीनियर (सोन) संगठन के सभी सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर मौजूद रहे।
किसानों और जनता के लिए क्या है योजना?
बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बांधों की क्षमता बढ़ाने और भूजल को रिचार्ज करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसके लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:
- पर्याप्त जल आपूर्ति: यह सुनिश्चित करना कि किसानों को सिंचाई के लिए और आम जनता को पीने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो।
- डी-सिल्टिंग (गाद निकालना): जिन बांधों और जलाशयों में गाद जमा हो गई है, उनके लिए तत्काल प्रोजेक्ट तैयार कर सरकार को सौंपे जाएं ताकि उनकी भंडारण क्षमता बढ़ सके।
जमीन प्रबंधन और सुरक्षा मानकों पर सख्ती
बांधों के सुचारू संचालन और सुरक्षा के लिए मंत्री ने भूमि प्रबंधन और कानूनी प्रक्रियाओं पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है।
- भूमि सर्वेक्षण और खारीज-दाखिल: बांधों के डूब क्षेत्र (submergence area) में आने वाली जमीनों का गहन सर्वेक्षण किया जाए और आवश्यकतानुसार खारीज-दाखिल की प्रक्रिया को सुनिश्चित किया जाए।
- DMF फंड का उपयोग: सोनभद्र जिले में बांधों के रखरखाव के कार्यों के लिए जिला मजिस्ट्रेट के साथ समन्वय स्थापित कर DMF फंड का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
- डैम सेफ्टी एक्ट का पालन: बांधों के पुनर्स्थापन और सुरक्षा व्यवस्था को डैम सेफ्टी एक्ट के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
गुणवत्ता और समयबद्धता से समझौता नहीं
मंत्री स्वातन्त्रय देव सिंह ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बांधों और जलाशयों से जुड़े कार्यों में गुणवत्ता, सुरक्षा और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ सीधे तौर पर किसानों और आम जनता तक पहुंचना चाहिए, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।