औरंगाबाद: दंगों से निपटने के लिए RAF और पुलिस का बड़ा मॉक ड्रिल
औरंगाबाद के ओबरा में RAF और स्थानीय पुलिस ने दंगों और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए संयुक्त मॉक ड्रिल की। जानें कैसे की गई ट्रेनिंग।

बिहार के औरंगाबाद जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सुरक्षा बलों ने एक महत्वपूर्ण अभ्यास किया है। मंगलवार को ओबरा क्षेत्र में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की डी/114 बटालियन और स्थानीय ओबरा पुलिस ने मिलकर एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दंगों, भीड़ के अनियंत्रित होने और किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने की तैयारियों को परखना था।
भीड़ नियंत्रण और घेराबंदी का कड़ा अभ्यास
इस मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा बलों ने विभिन्न चरणों में ट्रेनिंग ली। सबसे पहले संवेदनशील इलाकों की पहचान कर उन्हें घेराबंदी (cordon off) करने का अभ्यास किया गया। इसके बाद, अनियंत्रित भीड़ को नियंत्रित करने और दंगाइयों को काबू में करने की तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
अभ्यास के दौरान सुरक्षा बलों ने विशेष रूप से इन महत्वपूर्ण कौशलों पर ध्यान केंद्रित किया:
- भीड़ नियंत्रण: उग्र भीड़ को तितर-बितर करना और स्थिति को बिगड़ने से रोकना।
- घेराबंदी: संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित करना ताकि हिंसा का दायरा न बढ़े।
- सुरक्षित निकासी: संघर्ष वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया।
पुलिस और RAF के बीच तालमेल पर जोर
इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व कंपनी ऑफिसर दुर्गा नंदन श्रीवास्तव और डिप्टी कमांडेंट के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें असिस्टेंट कमांडेंट प्रवीण कुमार, 114वीं बटालियन के जवानों और ओबरा पुलिस के कर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। ड्रिल का एक प्रमुख लक्ष्य RAF और जिला पुलिस के बीच संचार और समन्वय (coordination) को और अधिक बेहतर बनाना था।
अधिकारियों ने टीमों की इस क्षमता का मूल्यांकन किया कि वे घटना स्थल पर कितनी तेजी से पहुँच सकते हैं और बदलती परिस्थितियों के अनुसार कितनी प्रभावी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए इस तरह के नियमित प्रशिक्षण सत्र बेहद आवश्यक हैं। इस अभ्यास से औरंगाबाद पुलिस और RAF के बीच परिचालन तालमेल को और मजबूती मिली है।