रघोपुर नाव हादसा: 13 मासूमों की मौत, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

Ghazala Saheb15 October 20262 min read0 viewsBihar
रघोपुर नाव हादसा: 13 मासूमों की मौत, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

बिहार के रघोपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना में 13 मासूम बच्चों की जान चली गई है। इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नियमों की अनदेखी बनी हादसे की वजह

मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि यह हादसा नियमों के खुले उल्लंघन का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाव के संचालन में सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी।

  • समय का उल्लंघन: समुद्री और अंतर्देशीय नौवहन नियमों के अनुसार, शाम 5 बजे के बाद नाव चलाने की अनुमति नहीं है।
  • पंजीकरण की कमी: नियमों के मुताबिक हर नाव का औपचारिक रूप से पंजीकृत होना अनिवार्य है, जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।

पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान

इस त्रासदी में प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए सरकार ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मंत्री के अनुसार:

  • राज्य सरकार की ओर से मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
  • केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त 2 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर मंत्री राम कृपाल यादव और उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और शोक संतप्त परिवारों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी।

पप्पू यादव का सरकार पर तीखा हमला

दूसरी ओर, इस घटना और राज्य में जारी बाढ़ के संकट को लेकर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेता केवल "लूटपाट" और समाज में जाति एवं धर्म के नाम पर विभाजन पैदा करने में व्यस्त हैं।

"बिहार की समस्याओं का क्या समाधान है? क्या कोई बाढ़ को रोक सकता है? जब तक ये राजनेता रहेंगे, बिहार का विनाश रुकने वाला नहीं है।" - पप्पू यादव

पप्पू यादव ने दावा किया कि बाढ़ से संबंधित विभिन्न घटनाओं में अब तक 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है, क्योंकि लोग राहत और पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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