'वोट चोरी' पर राहुल गांधी का बड़ा हमला: चुनाव आयोग और भाजपा पर लगाया 'देशद्रोह' का आरोप

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (EC), भाजपा और आरएसएस पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए उनके खिलाफ 'देशद्रोह' के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद चुनाव आयोग के भीतर चल रही खींचतान की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद शुरू हुआ है, जिसने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित फैसलों को लेकर भारी मतभेद चल रहे थे।
- चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार विभिन्न निर्णयों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी।
- विपक्ष का आरोप है कि इन आपत्तियों के बावजूद प्रक्रिया को बिना समाधान के आगे बढ़ाया गया।
राहुल गांधी का कड़ा रुख: "बख्शा नहीं जाएगा"
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है।" उन्होंने भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग की मिलीभगत को देशद्रोह करार दिया।
एक वीडियो साझा करते हुए गांधी ने चुनाव अधिकारियों को सीधे चेतावनी दी:
"मैं चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कह रहा हूँ: आप जो कर रहे हैं वह गलत है। यह देशद्रोह है, यह राष्ट्र के खिलाफ है। याद रखना, समय आएगा! हम आपको पकड़ लेंगे! आपको बख्शा नहीं जाएगा!"
'अदृश्य हाथ' और अवैध निर्णयों का आरोप
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस मुद्दे को और गहराते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कामकाज में किसी "अदृश्य हाथ" का प्रभाव दिखाई दे रहा है, जो आयोग के बाहर से उसे नियंत्रित कर रहा है।
तिवारी ने आयोग की कार्यप्रणाली पर निम्नलिखित सवाल उठाए:
- चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, सभी निर्णय या तो सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाने चाहिए।
- यदि दो चुनाव आयुक्त लगातार आपत्ति जता रहे थे, तो उन निर्णयों को मनमाना, सनकी और अवैध माना जाना चाहिए।
- यह स्थिति मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने (Impeachment) के लिए एक ठोस आधार बन सकती है।
विपक्ष ने उठाई कार्रवाई की मांग
इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है:
- अभिषेक बनर्जी (TMC): उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और इस पूरे मामले की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की है।
- पी. चिदंबरम (कांग्रेस): उन्होंने मांग की है कि हाल के वर्षों में चुनाव आयोग द्वारा लिए गए सभी महत्वपूर्ण निर्णयों की समीक्षा एक संसदीय समिति द्वारा की जानी चाहिए और SIR प्रक्रिया को तुरंत रोका जाना चाहिए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि SIR सहित सभी निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए हैं।