'कांग्रेस ने बैंक बनाए, मोदी सरकार उन्हें बेच रही है': आईडीबीआई बैंक पर राहुल गांधी का बड़ा हमला
राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक की बिक्री का विरोध करते हुए कहा कि कांग्रेस ने बैंक बनाए थे और मोदी सरकार उन्हें बेच रही है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर बेहद हमलावर हैं। उन्होंने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि जहाँ कांग्रेस के शासनकाल में देश के विकास के लिए बैंकों की स्थापना की गई थी, वहीं मोदी सरकार के दौरान इन बैंकों को बेचा जा रहा है।
कांग्रेस बनाम भाजपा: बैंकों के निर्माण और बिक्री का मुद्दा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस और भाजपा सरकार के दृष्टिकोण के बीच तुलना की। उन्होंने बैंकों के निर्माण और उनके निजीकरण के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए लिखा:
"कांग्रेस के समय में, राष्ट्र के उद्योग निर्माण के लिए आईडीबीआई (IDBI) की स्थापना की गई थी। मोदी के समय में, पहले बोली देखी गई, फिर कीमत तय की गई। कांग्रेस के समय में बैंक बनाए जा रहे थे। मोदी के समय में, उन्हें बेचा जा रहा है।"
उन्होंने आगे कर्मचारियों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए कहा कि वह आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़े हैं।
कर्मचारियों की चिंताएं: आरक्षण और सेवा शर्तें
आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों को लिखे एक पत्र में राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि निजीकरण से कर्मचारियों की सेवा शर्तों में भारी गिरावट आ सकती है। उन्होंने कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- आरक्षण का मुद्दा: राहुल गांधी ने दावा किया कि जब आईडीबीआई निजी स्वामित्व में चला जाएगा, तो अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण का प्रावधान भी खत्म हो जाएगा।
- सेवा शर्तें: उन्होंने कहा कि निजीकरण के बाद कर्मचारियों की पहले से कमजोर होती सेवा शर्तें और भी असुरक्षित हो जाएंगी।
- लाभकारी बैंक की बिक्री: उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार एक ऐसे बैंक को क्यों बेच रही है जिसे कर्मचारियों ने मिलकर लाभदायक बनाया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस का हमेशा से यह मानना रहा है कि निजी क्षेत्र के साथ-साथ एक मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) का होना जरूरी है। उनके अनुसार, सार्वजनिक बैंक केवल संपत्ति नहीं हैं जिन्हें बेचा जा सके, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण के उपकरण हैं।
क्या है आईडीबीआई बैंक का पूरा मामला?
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत नियंत्रण हिस्सेदारी को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) की सहायक कंपनी को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस सौदे की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- कुल सौदा: यह सौदा लगभग 52,878 करोड़ रुपये (5.56 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का है।
- हिस्सेदारी का हस्तांतरण: सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी।
- बदला हुआ स्वामित्व: बिक्री के बाद, सरकार की हिस्सेदारी घटकर 15 प्रतिशत और एलआईसी की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत रह जाएगी।
सरकार का स्पष्टीकरण
इस बीच, वित्त मंत्रालय ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि दूसरी बोली के दौर के दौरान आईडीबीआई बैंक के लिए आरक्षित मूल्य (Reserve Price) में न तो कोई कमी की गई और न ही कोई वृद्धि की गई। मंत्रालय के अनुसार, संशोधित प्रक्रिया से बोली की कीमत में 3,917 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि विनिवेश से संबंधित प्रक्रियाओं का निर्धारण 'कोअर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज ऑन डिसइन्वेस्टमेंट' (CGD) द्वारा किया गया था, जिसे कैबिनेट समिति द्वारा रणनीतिक लेनदेन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक निर्णय लेने का अधिकार दिया गया था।