KPSC में धांधली का मामला: राष्ट्रपति से मिले राजीव चंद्राशेखर और पीटी उषा
केरल लोक सेवा आयोग में भ्रष्टाचार और परीक्षा धांधली के आरोपों को लेकर सांसदों ने राष्ट्रपति से अनुच्छेद 317 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) में कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और भर्ती अनियमितताओं के गंभीर आरोपों को लेकर एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। भाजपा नेता राजीव चंद्राशेखर, राज्यसभा सांसद पीटी उषा और सी सदानंदन मास्टर के नेतृत्व में इस दल ने राष्ट्रपति से आयोग की कार्यप्रणाली की जांच करने और संवैधानिक प्रावधानों के तहत सख्त कदम उठाने का आग्रह किया है।
भ्रष्टाचार और परीक्षा में हेरफेर के आरोप
सांसदों ने राष्ट्रपति को सौंपे गए एक ज्ञापन में आरोप लगाया कि आयोग के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप और धांधली बढ़ गई है। उन्होंने विशेष रूप से 13 जुलाई, 2023 को केरल राज्य योजना बोर्ड के वरिष्ठ पदों के लिए आयोजित एक परीक्षा का उल्लेख किया।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (SIT) के निष्कर्षों के आधार पर बताया गया कि उस परीक्षा में 228 उम्मीदवारों के उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रश्नों (कुल 58 अंक) का मूल्यांकन ही नहीं किया गया। आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि उस उम्मीदवार को लाभ पहुंचाया जा सके जिसने प्रथम रैंक प्राप्त की थी।
अनुच्छेद 317 के तहत कार्रवाई की मांग
सांसदों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वह केरल के राज्यपाल की सिफारिश पर संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत कार्यवाही शुरू करें। उन्होंने मांग की है कि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के खिलाफ आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए मामले को सुप्रीम कोर्ट को भेजा जाए।
प्रमुख अनियमितताएं और शिकायतें
- परीक्षा में धांधली: एसआईटी को पीएससी परीक्षाओं से संबंधित 180 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से 9 परीक्षाओं की गहन जांच की आवश्यकता बताई गई है।
- भाई-भतीजावाद: योग्य उम्मीदवारों की मौजूदगी के बावजूद, राजनीतिक संबंधों वाले अस्थायी और संविदा कर्मचारियों को 'बैकडोर' नियुक्तियां दी जा रही हैं।
- योग्यता में गड़बड़ी: डाइट (DIET) लेक्चरर और सहायक सूचना अधिकारियों की भर्ती में अनुभव प्रमाण पत्रों और पात्रता मानदंडों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
- वेतन और भत्ते: आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को दिए जाने वाले भारी वेतन और भत्तों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सांसदों ने जोर देकर कहा कि ये केवल राजनीतिक आरोप नहीं हैं, बल्कि ऐसी जांच का विषय हैं जो क्राइम ब्रांच की एसआईटी और केरल उच्च न्यायालय के समक्ष भी आए हैं। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि आयोग के सदस्य संवैधानिक संरक्षण का हवाला देकर जांच अधिकारियों के सामने पेश होने से इनकार कर रहे हैं, जिसके कारण एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता और बढ़ गई है।