'मजबूत भारत दुश्मनों के लिए अच्छा नहीं': मोहन भागवत के बयान पर बोले राजीव चंद्रशेखर

भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों का पुरजोर समर्थन किया है। चंद्रशेखर ने चेतावनी दी कि भारत की बढ़ती ताकत और आर्थिक प्रगति कई दुश्मनों के लिए चुनौती बन गई है, जो देश के भीतर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
विकास की राह में अराजकता का खतरा
राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि मोहन भागवत का दृष्टिकोण और उनका अनुभव सभी भारतीयों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बहुत बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, कोविड के बाद के दौर में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि हमारे आसपास के दुश्मन यह अच्छी तरह जानते हैं कि एक मजबूत भारत उनके हितों के लिए सही नहीं है। उन्होंने कहा, "वे भारत के भीतर अपने समर्थकों का उपयोग करके देश की विकास दर को धीमा करने का प्रयास करेंगे। भारत जैसे लोकतंत्र को धीमा करने के लिए अराजकता और हिंसा का सहारा लिया जाता है। कुछ ताकतें सड़कों पर उतरकर हिंसा भड़काती हैं ताकि राज्य को उकसाया जा सके।"
सत्ता परिवर्तन पर मोहन भागवत का रुख
यह प्रतिक्रिया आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस संबोधन के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि "सत्ता परिवर्तन न तो हुआ है और न ही होगा।" नागपुर के रेशिमबाग मैदान में संघ के शताब्दी वर्ष के विजयदशमी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र किया था।
भागवत ने स्पष्ट किया कि सामाजिक समस्याओं और व्यवस्था की कमियों को लेकर विरोध प्रदर्शन होना स्वाभाविक है, लेकिन प्रदर्शनकारियों, प्रशासन और राजनीतिक नेताओं को संविधान, कानून और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का सम्मान करना चाहिए।
संजय राउत पर साधा निशाना
चंद्रशेखर ने शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने राउत को एक "उकसाने वाला" (provocateur) करार दिया। चंद्रशेखर ने कहा कि अराजकता और उथल-पुथल का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने फ्रांस और मध्य पूर्व के उन दृश्यों का हवाला दिया जहाँ भीड़ के हिंसक प्रदर्शनों के कारण भारी तबाही हुई है। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी अराजकता की आवश्यकता नहीं है जो देश के विकास और उत्थान की गति को बाधित कर दे।