"किसी नेता के कहने पर राजपूत दावेदारी नहीं छोड़ते": राजीव प्रताप रूडी का बयान
सारण में भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि बिहार में अब कोई नेता कहने पर राजपूत उम्मीदवार को पीछे नहीं हटा सकता।

सारण में आयोजित दिशा समिति की बैठक के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद राजीव प्रताप रूडी का बयान सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। रूडी ने बिहार की राजनीति और विशेषकर राजपूत समाज के भीतर नेताओं के प्रति विश्वास को लेकर एक बेहद बेबाक टिप्पणी की है।
राजपूतों के भरोसे पर तीखी टिप्पणी
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए रूडी ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में बिहार के किसी भी राजपूत को किसी नेता पर इतना भरोसा नहीं है कि उसके कहने मात्र से कोई दूसरा उम्मीदवार अपनी दावेदारी छोड़ दे। उन्होंने दो-टूक लहजे में कहा कि मेरे या किसी अन्य नेता के कहने पर कोई प्रत्याशी पीछे हट जाए, ऐसी परिस्थिति फिलहाल बिहार में नजर नहीं आती है।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से भाजपा तय करती है कि उसे किसे और कब महत्व देना है।
जदयू प्रत्याशी की हार पर जताई निराशा
सारण में राजग समर्थित जदयू उम्मीदवार की हार को रूडी ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि यह एक चिंताजनक विषय है क्योंकि तमाम कोशिशों और गठबंधन द्वारा पूरी ताकत झोंकने के बावजूद प्रत्याशी जीत हासिल करने में असफल रहा।
इस परिणाम से कार्यकर्ताओं में निराशा है, लेकिन लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है।
रूडी ने स्वीकार किया कि चुनावी नतीजों के कारण कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ा है, लेकिन उन्होंने राजनीति के बुनियादी सिद्धांत को भी याद दिलाया।
गठबंधन की एकजुटता और भविष्य की रणनीति
हार के बावजूद, रूडी ने एनडीए की एकजुटता पर अपना अटूट विश्वास जताया। उन्होंने बिहार में गठबंधन के मजबूत होने की बात कही। उन्होंने राज्य सरकार के कामकाज की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सानिध्य की सराहना की।
रूडी ने गठबंधन की स्थिति पर निम्नलिखित बातें कहीं:
- बिहार में गठबंधन पूरी तरह से एकजुट है।
- राज्य सरकार बेहतरीन कार्य कर रही है।
- यदि भविष्य में कोई मतभेद उभरते हैं, तो गठबंधन के वरिष्ठ नेता आपसी सौहार्द से उसका समाधान निकाल लेंगे।
वहीं, एक निर्दलीय उम्मीदवार के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने इसे संगठन का एक आंतरिक निर्णय बताया।