रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: लागत और प्रतिस्पर्धा भी है जरूरी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वावलंबन 2026 में कहा कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को लागत प्रभावी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होना चाहिए।

Ghazala Saheb26 October 20262 min read0 viewsBihar
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: लागत और प्रतिस्पर्धा भी है जरूरी

नई दिल्ली में आयोजित 'स्वावलंबन 2026' कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की रक्षा तैयारियों को लेकर एक बड़ा विजन साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का मतलब केवल घरेलू स्तर पर सामान बनाना नहीं है, बल्कि हमें ऐसे उत्पाद तैयार करने होंगे जो दुनिया के सामने अपनी श्रेष्ठता साबित कर सकें।

गुणवत्ता के साथ लागत और दक्षता भी है अनिवार्य

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आत्मनिर्भरता के इस दौर में हमें केवल मात्रा (Quantity) और गुणवत्ता (Quality) पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि असली चुनौती दक्षता और सामर्थ्य (Affordability) की है।

उनके अनुसार, भारत की रक्षा निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए तीन मुख्य स्तंभों पर काम करना होगा:

  • लागत प्रभावशीलता: रक्षा उपकरण किफायती होने चाहिए ताकि वे देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ न बनें।
  • परिचालन श्रेष्ठता: हमारे हथियारों और तकनीक का प्रदर्शन युद्ध के मैदान में दुनिया में सबसे बेहतर होना चाहिए।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारतीय रक्षा उत्पाद इतने सक्षम हों कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कड़ी टक्कर दे सकें।
"आत्मनिर्भरता के इस चरण में, हमें न केवल घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि यह उत्पादन लागत प्रभावी, परिचालन रूप से श्रेष्ठ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो।"

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि हमारी आत्मनिर्भरता का लक्ष्य केवल सुरक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि देश को आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाना होना चाहिए।

सप्लाई चेन की कमजोरियों को पहचानना होगा प्राथमिकता

रक्षा मंत्री ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत को अपनी सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) की कमजोरियों को गहराई से समझना होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में कुछ तकनीकी और महत्वपूर्ण वस्तुओं के लिए हमें बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, और जब तक घरेलू विकल्प तैयार नहीं हो जाते, यह स्थिति बनी रह सकती है।

आत्मनिर्भरता की राह के मुख्य कदम

पिछले एक दशक के अनुभव के आधार पर, उन्होंने सुझाव दिया कि अब भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए:

  1. यह पहचानना कि हमारी सप्लाई चेन में कहां सबसे ज्यादा जोखिम है।
  2. यह जानना कि हम किन महत्वपूर्ण वस्तुओं के लिए बाहरी देशों पर सबसे अधिक निर्भर हैं।
  3. उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देना जहां आत्मनिर्भरता हासिल करना सबसे ज्यादा जरूरी है।

अंत में, उन्होंने कहा कि इन कमजोरियों को दूर करने के लिए ठोस रणनीति बनाना और घरेलू संसाधनों को विकसित करना ही भारत को एक वास्तविक रक्षा शक्ति बनाएगा।

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